भाजपा का महापौर पर पक्षपात करने का आरोप

वीडियो कांफ्रेंसिंग बैठक में मनपा बजट मंजूर

मुंबई
पांच महीने बाद गुरुवार को मनपा सदन की वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए ली गई बैठक में मनपा का कोरोना के कारण पांच महीनों से लटका बजट मंजूर किया गया। बजट में विकास कार्य में दिए जाने वाले फंड में महापौर किशोरी पेंडणेकर ने पूरा फंड अपने पार्टी के नगरसेवकों को देने का काम किया। भाजपा ने कहा कि अन्य पार्टी के नगरसेवकों के साथ अन्याय करने का काम महापौर ने किया है। भाजपा सहित मनपा की अन्य पार्टी के सदस्यों ने महापौर के इस रवैए की आलोचना की है।
कोरोना महामारी की शुरुआत मार्च महीने में होने के बाद 20 मार्च से मुंबई में कर्फ्यू लगा दिया गया। मनपा का वर्ष 2020-21 का बजट स्थाई समिति में मंजूर होने के बाद इसे सदन की मंजूरी नहीं मिल पाई थी। मनपा सदन की 17 मार्च को आखिरी बैठक हो पाई थी। महापौर किशोरी पेंणडेकर ने गुरुवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के द्वारा मनपा सदन की बैठक रखी। इस बैठक का मुख्य कारण पांच महीनों से लटके बजट को मंजूर किया जाना था। बजट मंजूर नहीं होने से विकास कार्य ठप्प पड़े हुए थे। सबसे बड़ी बात थी कि नगरसेवकों को उनके क्षेत्र में काम करने की निधि भी उपलब्ध नहीं थी। महापौर द्वारा बुलाई गई बैठक में मनपा के सभी नगरसेवक वीडियो कांफ्रेंसिंग में मौजूद थे। महापौर द्वारा सभी पार्टी को उनके सदस्यों के अनुसार निधि दी जाती है। महापौर के अख्तियार में कुल 728 करोड़ की निधि सभी पार्टी को दी जानी थी। महापौर ने कुल विकास निधि का 70 प्रतिशत हिस्सा, मतलब 535 करोड़ रुपया शिवसेना पार्टी को दे दिया, जबकि मनपा सदन में शिवसेना और भाजपा के सदस्यों की संख्या में मात्र 10 सदस्य का अंतर है, लेकिन महापौर ने भाजपा को मात्र 13 प्रतिशत की निधि दी गई। बकाया 17 प्रतिशत में कांग्रेस-राकांपा और समाजवादी पार्टी सहित निर्दलीय सदस्यों को दिया गया। महापौर की इस रवैये से भाजपा सहित सभी पार्टी के सदस्यों ने उनके निर्णय का जमकर विरोध किया। भाजपा नेता प्रभाकर शिंदे ने कहा कि महापौर मुंबई की हैं, किसी की पार्टी की नहीं है। उन्हें इस तरह पक्षपात नहीं करना चाहिए था। भाजपा ने महापौर के इस निर्णय का विरोध करते हुए बैठक का बहिष्कार किया।
मनपा विरोधी पक्ष नेता रविराजा ने आरोप लगाया कि महापौर के द्वारा फंड को लेकर इस तरह की पक्षपात यह दर्शाता है कि कोरोना काल में अपने सदस्यों को सर्वाधिक फंड देकर भ्रष्टाचार करना है। मुंबई का समान रूप से विकास के लिए सभी पार्टी के सदस्यों को समान फंड देना चाहिए था।

भ्रष्टाचार उजागर करने का मिला फल
समाजवादी पार्टी नेता एवं विधायक रईस शेख ने आरोप लगाया कि शिवसेना के भ्रष्टाचार को हम उजागर कर रहे हैं, इसके लिए हमारे साथ इस तरह का व्यवहार किया जा रहा है। फंड कम कर शिवसेना को लग रहा है कि उनकी दादागिरी के आगे हम झुक जाएंगे। महाविकास अघाड़ी के धर्म का भी शिवसेना निर्वाह नहीं कर रही है। हम शिवसेना की अब पोल खोलेंगे।
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