कोरोना महामारी दो साल में हो सकती है खत्म: डब्ल्यूएचओ

नई दिल्ली
कोरोना महामारी को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख टेड्रोस गेब्रियेसस ने बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि महामारी दो साल में खत्म हो सकती है। 1918 में स्पेनिशफ्लू को खत्म होने में भी दो साल का समय लगा था। आज तकनीकी में काफी तरक्की हो चुकी है, इसलिए कोरोना को कम समय में रोका जा सकता है। टेड्रोस ने जेनेवा में एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान कहा कि हमारे पास महामारी रोकने की तकनीक भी है और ज्ञान भी। इतिहास पर गौर किया जाए तो पाएंगे कि अर्थव्यवस्था और समाज में परिवर्तन के कारण महामारियां फैलीं।

पीपीई में भ्रष्टाचार, हत्या के बराबर
एक सवाल के जवाब में टेड्रोस ने कहा कि पीपीई से जुड़ा भ्रष्टाचार हत्या जैसा अपराध है। इसे बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि अगर स्वास्थ्यकर्मी बिना पीपीई के काम कर रहे हैं तो वे हमारे लिए अपनी जान खतरे में डाल रहे हैं। पीपीई में भ्रष्टाचार होना ऐसे स्वास्थ्यकर्मियों के जीवन को खतरे में डालने जैसा है।
डब्ल्यूएचओ ने कोरोना के संक्रमण को रोकने में भारत की कोशिशों की तारीफ की है। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि भारत में संक्रमण बहुत तेजी से नहीं फैल रहा, लेकिन इसका रिस्क बना हुआ है। इसलिए सतर्क रहने की जरूरत है।

घनी आबादी वाले देशों में महामारी का ज्यादा खतरा
डब्ल्यूएचओ के हेल्थ डिजास्टर प्रोग्राम के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. माइक रियान ने शुक्रवार को कहा कि भारत में कोरोना के केस तीन हफ्ते में दोगुने हो रहे हैं, लेकिन मामले लगातार बढ़ रहे हैं। बांग्लादेश, पाकिस्तान और दक्षिण एशिया के घनी आबादी वाले देशों में भी अभी महामारी की स्थिति विस्फोटक नहीं हुई है, लेकिन ऐसा होने का जोखिम बना हुआ है। रियान ने चेतावनी दी कि अगर सामुदायिक स्तर पर संक्रमण शुरू हो जाता है तो ये काफी तेजी से फैलेगा। भारत में लोगों की आवाजाही दोबारा शुरू हो गई है, ऐसे में संक्रमण बढ़ने का जोखिम बना हुआ है।

'केस दोगुने होने की रफ्तार पर नजर रखना अहम'
डब्ल्यूएचओ की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि भारत में कोरोना के जितने मामले हैं वे 130 करोड़ की आबादी के हिसाब से बहुत ज्यादा नहीं हैं, लेकिन संक्रमण के बढ़ने की दर और मामलों के दोगुने होने की रफ्तार पर नजर रखना अहम है।

'आयुष्मान भारत योजना से मिलेगी मदद मिलेगी'
डब्ल्यूएचओ ने इस योजना की तारीफ करते हुए कहा है कि इसे तेजी से लागू किया जाए तो कोरोना महामारी से निपटने में मदद मिलेगी। टेड्रोस ने कहा कि कई देशों के सामने गंभीर चुनौती है, लेकिन इसमें मौके भी तलाशने होंगे। उन्होंने कहा कि भारत के लिए यह आयुष्मान भारत योजना को बढ़ाने का मौका हो सकता है।

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