अब पछताए होत का...जब चिड़िया चुग...

 जब आदमी या देश अपनी औकात भूलकर कुछ ऐसा कर जाता है जिससे फायदे की बजाय नुकसान ज्यादा होता है. तब उसके पास पछताने के अलावा कोई चारा नहीं रह जाता. पाकिस्तान आज अपने आपको कुछ वैसी ही हालत में पा रहा है. वह सऊदी अरब से तब से नाराज है, जब से कश्मीर मुद्दे पर उसने पकिस्तान की नहीं सुनी और इस्लामिक देशों की बैठक नहीं बुलाई. अलबत्ता पाक को ही समझाया कि भारत से ना उलझे. इसके बाद भी सऊदी, दिवालिया पाक को हर तरह की मदद करता रहा. तो जिसके सामने आप कटोरा लेकर खड़े रहते हो उसको आँख नहीं दिखाते और न ही उसके दुश्मनों से गले मिलकर उसे चिढ़ाते हैं. तुर्की और सऊदी अरब की प्रतिद्वंदिता काफी पुरानी और ऐतिहासिक है. कारण सऊदी अरब की तुलना में फक्कड़ तुर्की मुस्लिम जगत में वह स्थान और सम्मान चाहता है जो आज सऊदी अरब को हासिल है. दुनिया भर में अपने आतंकी कारोबार के चलते अछूत बन चुके पाक को जब दुनिया में तुर्की के अलावा दूसरा कोई मुस्लिम देश या दुनिया का अन्य कोई देश हमारे खिलाफ समर्थन देने को तैयार नहीं हुआ तो पाक तुर्की के इशारे पर नाचने लगा. ऐसा करते समय वह यह भूल गया कि ऐसा कर वह सऊदी अरब के कोप का शिकार हो जाएगा. पहले उसने मुस्लिम जगत को गोलबंद करने की कोशिश तुर्की और मलेशिया के साथ मिलकर की. वह सऊदी के कड़े तेवर के चलते औंधे मुंह गिर गयी. उसके बाद कोई समझदार आदमी या देश चुप बैठता, परन्तु आग से खेलने का पुराना शौक़ीन पाक जिसका आतंकवाद सबसे बड़ा कूटनीतिक हथियार है, और धंधा है, भला कैसे चुप रहा सकता है. उसके विदेश मंत्री ने सऊदी को खुलेआम चुनौती दे दी कि या तो सऊदी इस्लामिक देशों की बैठक बुलाये अथवा वे खुद बुलायेंगे. ऐसा करते समय पाक यह भूल गया कि भिखारी को चुनने का अधिकार नहीं होता है, उसे जो मिलता है उसी से संतोष करना पड़ता है. उनकी इस गीदड़ भभकी ने सऊदी अरब को आग बबूला कर दिया. उसने अपना दिया कर्ज मांग लिया और तेल-गैस की सप्लाई भी बंद कर दिया. इस पर उसकी सारी हेकड़ी हवा हो गयी और पाक के असली निजाम यानी सेना अध्यक्ष बाजवा सऊदी को मनाने रियाद पहुंच गये. परन्तु जिस तरह से वहां के युवराज ने उनसे मिलने को इनकार कर दिया और बाजवा के भूसपाट होने को भी कोई तवज्वो नहीं दी. साफ़ है कि पाक को उसकी नादानी काफी महंगी साबित हुई. ऐसे संकेत है कि यह नादानी अब उनके विदेश मंत्री की कुर्सी भी ले बीतेगी. पुरानी कहावत है कि 'अब पछताए होत का जब चिड़िया चुग गयी खेत' यह पाक पर पूरी तहर फिट बैठती है. कारण अपनी औकात भूल कर उसका आतंकी कारोबार करना और किसी को भी आँख दिखाना अब दुनिया के सामने उजागर है. दुनिया अब उसे घास डालने को तैयार नहीं है. अच्छा होगा कि वहा अब भी समझ जाए और अपनी दिवालिया हालत को सुधारने एवं आतंकी कारोबार से तौबा करने की नीति अपनाए. नहीं तो उसका नेस्तनाबूद होना तय है. 

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