होम कोरेंटाइन का आदेश मौलिक अधिकारों का हनन नही

मुंबई
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि 10 दिनों तक होम कोरेंटाइन रहने का आदेश नागरिकों के मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं करता है। हर नागरिक को सामाजिक दूरी का पालन करना चाहिए। राज्य में जिस तरह कोरोना के मामले बढ़े हैं, उसके मद्देनजर कोरेंटाइन कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए कारगर कदम है। न्यायमूर्ति केके तातेड़ की खंडपीठ ने कहा कि कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए ठोस कदम उठाना समय की जरूरत है। विशेष रुप से ऐसी जगहों पर, जहां एक इलाके से दूसरे इलाके में जाने वाले लोगों की संख्या अधिक है। खंडपीठ ने कहा कि हम राज्य सरकार की ओर से कोकण को लेकर लगाई गई पाबंदियों की सराहना करते हैं। होम कोरेंटाइन से संबंधित सरकार का निर्देश लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता है। खंडपीठ ने यह बात कोकण में गणेशोत्सव के लिए अलग अलग-जगह से कोकण जा रहे लोगों के संदर्भ में कहीं हैं।
सरकार की ओर से पिछले दिनों निर्देश जारी किया गया था। जिसके खिलाफ जी संतोष ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में दावा किया गया था कि सरकार की ओर से लगाई गई पाबंदियां नागरिकों के स्वतंत्र होकर देश के भीतर एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करने से रोकती है। जो नागरिकों के मौलिक अधिकार का हनन है। सरकार की ओर से जारी किए गए निर्देश के तहत 12 अगस्त तक एसटी बस व निजी वाहन से कोकण जाने वालों के लिए 10 दिन तक होम कोरेंटाइन में रहने को कहा गया है। यह उचित नहीं है। इसके अलावा और भी कई पाबंदियां हैं। जो असंवैधानिक हैं। याचिका पर गौर करने के बाद खंडपीठ ने सरकार की ओर से जारी किए गए आदेश में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया और याचिका को खारिज कर दिया।
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