विधानसभा उपचुनाव की घोषणा से बढ़ी सियासी सरगर्मी

लखनऊ
चुनाव आयोग की ओर से बिहार के साथ उत्तर प्रदेश की रिक्त विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराने के ऐलान के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई हैं। यूपी की जिन आठ सीटों पर उपचुनाव होने हैं, उसमें से छह बीजेपी)और दो एसपी के कब्जे वाली हैं। इन आठ सीटों के नतीजों से विधानसभा में बहुमत पर तो कोई विशेष असर नहीं पड़ेगा, लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश जरूर होगा। कोरोना काल के बाद बने सियासी हालात और विपक्षी दलों द्वारा जातिवाद को गर्माने का नफा- नुकसान भी देखा जाएगा। उत्तर प्रदेश की जिन आठ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव प्रस्तावित हैं, उसमें फीरोजाबाद की टूंडला सीट भारतीय जनता पार्टी के डॉ.एसपी सिंह बघेल के सांसद निर्वाचित होने पर त्यागपत्र देने से रिक्त है, लेकिन न्यायालय में विवाद लंबित होने के कारण यहां अब तक उपचुनाव नहीं हुआ। रामपुर की स्वार सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खां के पुत्र अब्दुल्ला आजम जीते थे। उनकी सदस्यता जन्मतिथि विवाद में निरस्त हुई। वहीं उन्नाव की बांगरमऊ से भारतीय जनता पार्टी के कुलदीप सिंह सेंगर जीते थे। उनकी सदस्यता उम्र कैद की सजा मिलने के कारण रद्द हुई।
इसके अलावा जौनपुर के मल्हनी क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के पारसनाथ यादव जीते थे, लेकिन लंबी बीमारी में निधन होने के कारण यह सीट रिक्त हुई। देवरिया सदर से भारतीय जनता पार्टी के जन्मेजय सिंह और बुलंदशहर से भारतीय जनता पार्टी के वीरेंद्र सिरोही की सीटें भी निधन के कारण रिक्त हैं, जबकि कानपुर की घाटमपुर सीट भारतीय जनता पार्टी की कमल रानी वरुण और अमरोहा की नौगावां सादात भारतीय जनता पार्टी के चेतन चौहान की कोरोना वायरस के संक्रमण से मृत्यु होने से रिक्त है। दोनों योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी थे।

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