पाकिस्तान आतंकवाद का केंद्र

भारत ने कहा-आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ना होगा


नई दिल्ली

भारत ने सार्क देशों के विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक में सीमा पार समर्थित आतंकवाद का मुद्दा उठाया। वर्चुअल बैठक के बाद खुद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा है - सीमा पार आतंकवाद, खत्म कनेक्टिविटी और ट्रेड में रुकावट वो तीन चैलेंज हैं जो इस वक्त सार्क देशों के सामने हैं। सार्क देशों को इस चैलेंज से पार पाना होना होगा। अगर ऐसा हुआ तभी हम अपने दक्षिण एशिया क्षेत्र में शांति, समृद्धि और सुरक्षा देख पाएंगे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने बताया-बैठक के दौरान एस. जयशंकर ने साफ किया कि बीते 35 वर्षों के दौरान सार्क देशों ने बेहतर प्रगति की है लेकिन सामूहिक प्रयास और समृद्धि आतंकी घटनाओं की वजह से प्रभावित हुई हैं। उन्होंने आतंक की समाप्ति के लिए सामूहिक प्रयास पर जोर दिया है।
इस दौरान विदेश मंत्री ने सार्क देशों के सहयोगियों को भारत की तरफ से दी गई मदद का भी जिक्र किया। उन्होंने मालदीव, भूटान और श्रीलंका का जिक्र किया। भारत की तरफ से साफ किया गया कि आतंक और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भी बैठक में हिस्सा लिया।
एशिया में वार्ता एवं विश्वास निर्माण उपायों पर सम्मेलन (सीआईसीए) में मंत्रियों की विशेष बैठक के दौरान भारत ने राइट टू रिप्लाई के तहत पाकिस्तान को निशाने पर लिया। भारत ने कहा कि पाकिस्तान ने भारत के बारे में भ्रांतियां फैलाना जारी रखकर एक और मंच का दुरुपयोग किया है। भारत ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न हिस्से हैं और रहेंगे। पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। पाकिस्तान में आतंकवाद को समर्थन दिए जाने का मुद्दा उठाते हुए भारत ने कहा कि पाक वैश्विक आतंकवाद का परिकेंद्र है। पाकि स्तान अभी भी भारत में आतंकी गतिविधियों का सोर्स बना हुआ है। बैठक में मौजूद भारतीय पक्ष ने कहा कि हम पाकि स्तान को सलाह देते हैं कि वह भारत के खिलाफ आतंकवाद को मदद और समर्थन देना बंद करे।

इस बार पाक की नक्शेबाजी नहीं
सार्क देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में पाकि स्तान की ओर से भी विदेश मंत्रालय के लोग शामिल हुए। लेकिन इस दौरान बैकग्राउंड में पाकि स्तान ने कोई नक्शा नहीं लगाया था। दरअसल पिछली बार पाकि स्तान ने बैठक में एक काल्पनिक नक्शा पेश किया था और उसमें भारत की जमीन को भी अपना बताया था। पाकि स्तान के इस नक्शे के बाद एनएसए डोभाल ने काफी सख्ती दिखाई थी और पड़ोसी देश के इस काल्पनिक नक्शे का विरोध करते हुए मीटिंग छोड़कर चले गए थे। बता दें कि जो नक्शा पाकि स्तान ने प्रदर्शित किया था, उसे हाल ही में संसद में मंजूरी दी गई है।
इस पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा था कि पाकिस्तान के प्रतिनिधि डॉक्टर मोईद ने सर क्रीक रेखा के तहत आने वाले हिस्सों को भी अपने क्षेत्र में बताने वाले नक्शे को मीटिंग में प्रदर्शित किया था। इसके तहत उसने गुजरात के जूनागढ़ पर भी अपना दावा किया है। एनएसए डोवाल इस मीटिंग में पाक के इस नक्शे के प्रदर्शित होने के बाद मीटिंग से उठकर चले गए थे। पिछली बार हुई वर्चुअल मीटिंग में एनएसए डोवाल की जगह उनकी खाली कुर्सी रखी गई थी। पाकिस्तान के प्रतिनिधि डॉक्टर मोइद युसूफ जहां पर बैठे थे उसके पीछे पाकिस्तान का राजनीतिक नक्शा नजर आ रहा था। यही नक्शा डोवाल की नाराजगी की वजह बन गया था। वैश्विक मंचों पर बार-बार फटकार खाने के बाद भी पाकिस्तान खुद को आतंकवाद से अलग नहीं कर पाता। वहां पर आज भी आतंकवाद की नर्सरी चल रही है।

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