मोदी सरकार में बढ़ी फसलों की खरीद


नयी दिल्ली

मोदी सरकार के कार्यकाल में किसानों को उनकी फसलों पर मिलने वाला न्यूनतम समर्थन मूल्य पहले की तुलना में बेहतर हुआ है और इसमें वृद्धि भी हुई है। साल 2006 में स्वामीनाथन कमेटी सिफारिशों को मोदी सरकार ने 2018 में लागू किया था। इसके तहत किसानों को उनके उत्पादन खर्च का 1.5 गुना एमएसपी मिलना सुनिश्चित हुआ। एमएसपी लागू करने से किसानों को सामान्य समय में या जब बाजार में बहुत उतार-चढ़ाव देखने को मिले, तब उन्हें उनकी फसल की सही कीमत सुनिश्चित होता है। कुछ प्रमुख फसलों के लिए साल 2009-14 और बीते 5 साल की तुलना करें तो इसमें करीब इसमें इजाफा हुआ। साथ ही इन फसलों की सरकारी खरीद भी बढ़ी है। बीते 5 साल में धान की फसलों पर मिलने वाले एमएसपी में 2.4 गुना इजाफा हुआ है।

5 साल में गेहूं की एमएसपी में 1.77 गुना का इजाफा

साल 2009-10 से लेकर 2013-14 में किसानों को 2.06 लाख करोड़ रुपये का एमएसपी पेमेंट हुआ है। जबकि, बीते पांच साल में यह बढ़कर 4.95 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा है। 2009-10 से लेकर 2013-14 की तुलना में देखें तो बीते 5 साल के दौरान गेहूं की एमएसपी में 1.77 गुना का इजाफा हुआ है। गेहूं की फसलों के लिए पहले जहां 1.68 लाख करोड़ रुपये का पेमेंट हुआ था, वहां बीते 5 साल में यह पेमेंट 2.97 लाख करोड़ रुपये का हुआ है।

इसी प्रकार दालों के लिए एमएसपी में 75 गुना का इजाफा हुआ है। 2009-10 से लेकर 2013-14 के बीच दालों के लिए कुल 645 करोड़ रुपये का एमएसपी पेमेंट हुआ था। लेकिन, बीते पांच साल में यह आंकड़ा 49,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। ऑयलसीड्स और कोपरा के लिए एमएसपी पेमेंट में भी 10 गुना का इजाफा हुआ है। साल 2009-10 से लेकर 2013-14 के बीच ऑयलसीड्स और कोपरा पर कुल 2,460 करोड़ रुपये का एमएसपी पेमेंट हुआ था। बीते पांच सालों में देखें तो सरकार ने इसके लिए कुल 25,000 करोड़ रुपये का एमएसपी पेमेंट किया है। रबी 2020 के लिए गेहूं की भी इस साल रिकॉर्ड सरकारी खरीद देखने को मिली है। इस साल सरकारी एजेंसियों ने 382 लाख मिट्रिक टन गेहूं की खरीद की है।


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