अब नई तकनीक से होगी मीठी नदी की सफाइ

मुंबई
मीठी नदी की सफाई करने के लिए अब बायो फायटो रेमेडीएशन परियोजना का उपयोग किया जाएगा।राज्य सरकार ने एमएमआरडीए को इसका जिम्मा सौंपा है। 26 जुलाई में बाढ़ की विभिषिका से चर्चा में आई मुंबई की मीठी का स्वरूप बदलने वाला है। मीठी नदी में बायो फायटो रेमेडियशन परियोजना से नदी का प्रदूषित पानी स्वच्छ करने के लिए एमएमआरडीए ने बीडा उठाया है। जैव अभियांत्रिकी के हिस्सा कहे जाने वाले बायोमेरेडियेशन और फायटोरेमेडिएशन का उपयोग कर मीठी नदी के पानी की गुणवत्ता को सुधारा जाएगा। इस परियोजना के अंतर्गत सूक्ष्मजीव तकनीक तथा शाश्वत वनस्पती का प्रयोग कर पानी को स्वच्छ बना कर दुर्गंधमुक्त किया जाएगा। इससे मीठी के आस पास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य संबंधी रोगों को भी कम किया जाएगा। इसी तरह मीठी नदी का उपयोग पर्यटन स्थल के रूप में भी करने की योजना है।
यह परियोजना क्रियान्वित करने के लिए अर्थ 5 और एमएमआरडीए के बीच करार किया गया है।पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे, परिवहन मंत्री अनिल परब की उपस्थिति में करार पर हस्ताक्षर किए गए।
मीठी नदी के प्रवाह का 6 किमी लंबाई के हिस्से पर मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण का अधिपत्य है। एमएमआरडीए पर मीठी नदी का विकास कार्य करने की जिम्मेदारी है। मीठी नदी की सफाई योजना के लिए एमएमआरडीए को मरीन डेब्रीज पार्टनरशिप ने प्रस्ताव दिया था। मरीन डेब्रीज पार्टनरशिप यूनायटेड नेशन्स टेक्नॉलॉजी इनोवेशध लैब , फिनलैंड वीटीटी टेक्निकल रिसर्च सेंटर, फिनलैंड की रिवर रिसायकल और अर्थ 5 आएनवायरमेंटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड संस्था है। रिवर सायकल संस्था नदी की साफ सफाई के लिए आवश्यक तकनीकी ज्ञान, समुद्र से नदी में आने वाले प्लास्टिक और तैरने वाले कचरे को रोकने के लिए तकनीकी उपलब्ध कराएगी। मरीन डेब्रिज पार्टनरशिप इस परियोजना की प्रगति की देखरेख करेगी। मीठी नदी में तैरने वाले कचरे को एकत्रित कर दुबारा उपयोग में लाने पर काम करेगी। परियोजना के शुरुआती चरण में जानकारी प्राप्त करने के लिए ड्रोन सर्वेक्षण और आर्टिफिशिअल इंटेलिजेन्स टूल्स का उपयोग किया जाएगा।
परियोजना कचरा एकत्र करने की तकनीक पर आधारित है। सोल्यूशन कॉन्सन्ट्रेशन मॉड्युल्स पानी के प्रवाह पर संचालित है। नदी से कचरा जमा करने के बाद माड्यूल में भेजा जाएगा। कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से कचरे को ले जाया जाएगा जहां पर प्लास्टिक को अलग किया जाएगा। पानी के प्रवाह से ही कन्वेयर बेल्ट के लिए चलाने के लिए बिजली की आपूर्ति होगी। परियोजना के लिए 18 महीने का समय लगेगा। इसमें जनजागृति कार्यक्रम चलाना, 100 किलो प्लास्टिक जमा कर उसका विश्लेषण करने नदी की सफाई के लिए यंत्र सामग्री लगाने में 5 महीने लगेंगे। बचे हुए 12 महीने में प्रतिदिन 50 टन कचरा निकाल कर प्रक्रिया की जाएगी। आहे। परियोजना के लिए हुतामाकी फिनिश और आघाडी का ग्राहक पॅकेजिंग कंपनी की तरफ से 6 करोड़ रुपये आर्थिक सहायता दी जाएगी।
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