चीन को चोट की तैयारी : दीपावली में पूजे जाएंगे गोबर के लक्ष्मी

गोरखपुर
इस बार की दीपावली को खुशियों से सराबोर करने के साथ चीन को पूरी तरह से बाजार से बाहर करने की तैयारी भी जोरों पर है। उत्तर प्रदेश में माटी कला बोर्ड मिट्टी शिल्पकारों को प्रतिमाएं एवं दीए बनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है। स्थानीयता को तवज्जो देते हुए गोरखपुर में पहली बार देसी गाय के गोबर से लक्ष्मी एवं गणेश की प्रतिमाएं बनाने की तैयारी है। सहकार भारती की ओर से महिलाओं को इस संबंध में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

सहकार भारती की ओर से महिलाओं को दी जाएगी ट्रेनिंग
पिछले साल तक बाजार में चीन निर्मित मूर्तियों का बोलबाला रहता था लेकिन इस बार स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जा रहा है। इस दिशा के कदम बढ़ाते हुए सहकार भारती ने महिला समूहों के जरिए देसी गाय के गोबर से प्रतिमा बनाने का काम शुरू किया है। गोरखपुर में भी रविवार से इसका प्रशिक्षण शुरू ही गया है। देसी गाय के सूखे गोबर का पावडर लेकर उसमें पहले से तैयार कुछ अन्य पदार्थो का मिश्रण मिलाया जाएगा। उसके बाद सांचे से लक्ष्मी गणेश की प्रतिमा तैयार हो जाएगी। सहकार भारती की महिला प्रदेश प्रमुख मीनाक्षी राय के अनुसार महिलाओं का समूह तैयार किया गया है। रविवार से इसके लिए प्रशिक्षण भी शुरू हुआ है। कानपुर से प्रशिक्षक को बुलाया गया है। ये मूर्तियां काफी आकर्षक होंगी और पर्यावरण के अनुकूल भी होंगी। इसकी मार्केटिंग भी महिला समूह के जरिए ही की जाएगी।

मंदिर में चढ़ाए फूलों से बनेगी धूप बत्ती
लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा बनाने के साथ ही महिलाओं को धूप बत्ती बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए मंदिर में चढ़ाए जाने वाले व अन्य कार्यों के बाद बेकार हुए फूलों का प्रयोग किया जाएगा। मीनाक्षी राय के अनुसार फूलों के साथ ही नीम की पत्ती, गुग्गुल, लोहबान जैसे पदार्थ भी मिलाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि बिजली के अधिक प्रयोग से रेडिएशन का खतरा बढ़ रहा है। यह धूप बत्ती उस खतरे को कम करने में भी सहायक होगी।

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