चीन से निपटने में सक्षम: रावत

Bipin Rawat
नई दिल्ली
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने गुरुवार को चीन को सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हम अपनी सीमाओं पर शांति चाहते हैं, लेकिन चीन की ओर से आक्रामक कार्रवाई देखी जा रही है। सीडीएस रावत ने यह भी कहा कि हम चीन की उकसावे वाली कार्रवाईयों से निपटने में सक्षम हैं। हमारी तीनों सेनाएं अग्रिम मोर्चे के सभी खतरों से निपटने में समर्थ हैं। उन्होंने बताया कि जो जवान अग्रिम मोर्चे पर तैनात हैं, लड़ाकू विमानों को उड़ा रहे हैं, समुद्र में जहाजों पर तैनात हैं, उनमें से कोई भी कोरोना से प्रभावित नहीं है।
जनरल रावत ने कहा कि यदि हमारी उत्तरी सीमा पर कोई खतरा पैदा होता है और पाकिस्तान इसका फायदा उठाने की कोशिश करता है, हमारे लिए परेशानी पैदा करता है तो हमने इसके लिए तैयारियां कर रखी हैं। यदि पाकिस्तान ऐसी कोई हिमाकत करता है तो उसे मुंहतोड़ जवाब मिलेगा। हम अपनी सीमाओं पर शांति चाहते हैं, लेकिन बीते कुछ दिनों के दौरान हमने देखा कि चीन ने कुछ आक्रामक कदम उठाए हैं। हमारी तीनों सेनाएं सीमाओं पर हर तरह की उकसावे वाली कार्रवाइयों और खतरों से निपटने में पूरी तरह समर्थ हैं।

'चीन की दादागीरी नहीं चलेगी'
केंद्र सरकार ने चीन पर निशाना साधा है। सरकार ने कहा है कि चीन का मकसद यथास्थिति में एकतरफा बदलाव करना है। चीन के साथ सीमा विवाद पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'चीन की गतिविधियों का मकसद यथास्थिति में एकतरफा बदलाव करना है। यह साफ है कि बीते चार महीने में हमने जो हालात देखे हैं,वे स्पष्ट रूप से चीनी पक्ष की गतिविधियों का नतीजा हैं।'
विदेश मंत्रालय ने पूर्वी लद्दाख में गतिरोध पर कहा कि जिम्मेदाराना तरीके से पूरी स्थिति को संभाला जाना चाहिए। श्रीवास्तव ने कहा, 'हम पुरजोर तरीके से चीन से आग्रह करते हैं कि वह पूरी तरह पीछे हटकर सीमा पर तेजी से शांति बहाली के लिए गंभीरता से भारतीय पक्ष का साथ दे।' प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि चीन के साथ सीमा विवाद मामले में आगे भी बातचीत जारी रहेगी। भारत बातचीत के जरिए सभी मुद्दों का हल निकालने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता जी रोंग ने कहा है कि चीन इस मामले में शांतिपूर्ण तरीके से हल ढूंढ़ने का पक्षधर रहा है। हम अमेरिका से आग्रह करते हैं कि वह अफवाहें फैलाना बंद करे। चीन और भारत में अपने संबंधों को नियंत्रित करने की पूरी क्षमता है। हमें दूसरों की मध्यस्थता या दखल स्वीकार नहीं है।

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