एक अक्टूबर से सड़कों पर दौड़ेंगी सरेंडर बसे

मऊ

तीन माह से रोडवेज बसों को लेकर फजीहत झेल रहे यात्रियों की मुश्किलें अब खत्म होने वाली हैं। कोरोना काल के दौरान आजमगढ़ परिक्षेत्र की सरेंडर की गईं 104 रोडवेज बसें एक अक्टूबर से सड़कों पर दौड़ने लगेगी। लॉकडाउन में घाटे की वजह से जुलाई माह में इन्हें सरेंडर कर दिया गया था। तीन माह के लंबे अंतराल के बाद एक अक्टूबर से सभी बस चलनें लगेगी। इसी के साथ यात्रियों को होने वाली परेशानी पर विराम लग जाएगा। यानी हर रूट पर यात्रियों को बसें मिलना शुरू हो जाएंगी।

आजमगढ़ रीजन में कुल सात डिपो आते हैं। इसमें आजमगढ़ डिपो, अंबेडकर डिपो, मऊ डिपो, दोहरीघाट डिपो, शाहगंज डिपो, बलिया डिपो व बेल्थरारोड डिपो शामिल है। इन डिपों पर कुल बसों की संख्या 404 हैं। कोरोना संक्रमण को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में 25 मार्च से लॉकडाउन घोषित कर दिया था। इसी के साथ रोडवेज की सेवा भी बंद कर दी गईं थी।

इस बीच रोडवेज को करोड़ों का घाटा जहां उठाना पड़ा वहीं आर्थिक स्थिति भी बिगड़ने लगी थीं। बीते एक जून से रोडवेज बसों को संचालित करने का निर्णय लिया गया था। जून माह में मऊ डिपो को प्रतिदिन 5.50 लाख रुपये राजस्व का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। सामान्य दिनों में मऊ डिपो अपना लक्ष्य भी इसी रेसियो से पूरा करता है। जून माह में प्रतिदिन केवल तीन लाख रुपये राजस्व मिला था। यानी हर दिन ढाई लाख रुपये का घाटा हुआ था। इसे देखते हुए निगम ने रोडवेज की बसों को सरेंडर करने का आदेश जारी कर दिया था। मऊ डिपो की कुल 14 बसें, आजमगढ़ डिपो की 17 व अंबेडकर डिपो की 13 बसें सरेंडर की गई थीं। इसी प्रकार अन्य डिपो ने भी बसों को सरेंडर कर दिया गया था। जिन्हें पुन: चलाने का फैसला लिया गया है।

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