निलंबित सांसदों के समर्थन में पवार ने रखा उपवास

मुंबई
राज्यसभा में हंगामा के कारण निलंबित किए गए आठ सांसदों के समर्थन में राकांपा अध्यक्ष शरद पवार आगे आए हैं। मंगलवार को उन्होंने निलंबित सांसदों के समर्थन में एक दिन के लिए अन्न त्याग का एलान किया। उन्होंने राज्यसभा उपाध्यक्ष हरिवंश की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी भूमिका सदन की प्रतिष्ठा गिराने वाली रही है। कृषि विधेयक पेश होने के दौरान सदन से अपनी गैर हाजिरी पर पवार ने सफाई भी दी है। यशवंत राव प्रतिष्ठान में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पवार ने कहा कि कहा कि राज्यसभा में जो अब तक नहीं हुआ था, वह भी देखने को मिल गया। उपसभापति को सदस्यों की बात सुननी चाहिए थी। उन्हें बोलने का मौका देना चाहिए था। पवार ने कहा कि कृषि विधेयकों पर दो-तीन दिनों तक चर्चा होने वाली थी। लेकिन सत्तापक्ष इसे जल्द से जल्द पारित कराने में लगा था। सदस्य उस पर बोलना चाहते थे, लेकिन उनकी बातें नहीं सुनी गई। वे यही कह रहे थे जो हो रहा है वह नियमों के खिलाफ है। जब उनकी बातें नहीं सुनी गई तो वे वेल में आ गए। उपसभापित न सदस्यों की बात सुनने की बजाय ध्वनिमत से विधेयक पारित कर दिया। इस वजह से सदस्यों ने तीव्र प्रतिक्रिया जताई। राज्यसभा में विधेयक पेश होने के दौरान राकांपा अध्यक्ष व देश के पूर्व कृषिमंत्री शरद पवार की गैर मौजूदगी को लेकर सवाल किए जा रहे हैं। इस पर पवार ने कहा कि मराठा आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के स्थगन आदेश के मद्देनजर कोर्ट में सरकार को अपना पक्ष मजबूती से रखना है। इसको लेकर राज्य सरकार से चर्चा के लिए मुझे मुंबई आना पड़ा। मराठा आरक्षण को लेकर जल्द से जल्द अदालत में अपील करना जरुरी है। इस लिए मुझे मुंबई में रुकना पड़ा।
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