कोरोन काल के कुछ अच्छे सबक

Corona Virus
कोरोनावायरस के कारण लगे लॉकडाउन में लोगों ने बेहद सीमित संसाधनों में परिवार के साथ रहकर अपना समय व्यतीत किया है। भले ही जिंदगी व्यतीत करने के लिए संसाधन कम है लेकिन अपनों का स्वास्थ्य और साथ रहने का महत्व कितना अधिक होता है, यह कोरोनावायरस ने सिखा दिया। कोरोना काल के मुश्किलभरे दौर में इंसानियत बढ़ी है। लोग एक-दूसरे की तकलीफों को समझ रहे हैं।
वाकई कोरोना व लॉकडाउन का यह काल जिंदगी का एक अहम सबक हम सबको देकर गया है। कोरोनावायरस से बचाव के लिए किए गए लॉकडाउन के समय अधिकतर कर्मचारियों को अपने घर से रहकर काम करने के लिए कहा गया, वहीं कर्मचारी भी ऑनलाइन काम बखूबी कर रहे हैं जिससे वर्क फ्रॉम होम के कल्चर को बढ़ावा मिला।
कोरोना काल में घर-घर में साफ-सफाई और हाइजिन की अहमियत को समझा जा रहा है। लोग अब सफाई पर बहुत अधिक ध्यान दे रहे हैं। व्यक्तिगत हाइजिन को समझा जाने लगा है। सड़कों  पर गंदगी फैलाने जैसी बुरी आदतों पर ब्रेक लगा है। अब लोग सड़कों पर थूकने या कचरा फेंकने से कतराते हैं। आसपास के लोगों से बात न करने वाले लोग भी आज आसपास में घर की बालकनी में खड़े होकर रिश्तों की मिठास बढ़ा रहे हैं।
पहले जहां लोग अपनी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए मॉल्स या मार्केट का रुख करते थे, अब कोरोनावायरस के डर से भीड़भाड़ वाले इलाके में जाने से कतराते हैं जिससे ऑनलाइन शॉपिंग में तेजी देखी जा रही है।
ऐसे लोग जिन्होंने अपनी दिनचर्या में ऐसी चीजों को शामिल किया था, जो उनके स्वास्थ्य के लिए किसी जहर से कम नहीं थीं, वे चीजें भी इस दौरान लोगों की छुटीं।
ऐसे लोग जो हर समय अपनी दुनिया में व्यस्त रहते थे और परिवार के सदस्यों को समय नहीं दे पाते थे, वे लोग अब परिवार के सदस्यों को अपना समय दे रहे हैं। बच्चों के साथ खुश हैं और उनको भरपूर समय देने के लिए इस समय का पूरा सदुपयोग कर रहे हैं।
दूर रहकर भी रिश्तों को बखूबी निभाया जा सकता है, कोरोना काल से यह सबक मिला। लॉकडाउन के दौरान लोग दोस्तों व रिश्तेदारों से दूर थे लेकिन बिना मिले अपने रिश्तों को कैसे सहेजकर रखा जा सकता है, इस बात का अच्छा अनुभव मिला।

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