'महाराजा' पर सरकार ने खड़े किए हाथ

Air India
नई दिल्ली
सरकार ने मंगलवार को साफ-साफ कहा कि कर्ज में डूबी सरकारी एयलाइंस एयर इंडिया को या तो बेचा जाएगा या बंद किया जाएगा। इसके अलावा कोई चारा नहीं है। सिविल एविएशन मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में यह बात कही।
एयरक्राफ्ट एमेंडमेंट बिल, 2020 के पारित होने से पहले उन्होंने एयर इंडिया के निजीकरण के बारे में कहा कि अगर सरकार इसमें मदद कर सकती, तो वह इसका परिचालन जारी रखती। लेकिन कंपनी पर 60 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है और सरकार के पास इसे निजी हाथों में सौंपने या बंद करने के अलावा कोई चारा नहीं है।
उन्होंने कहा, 'हमें पूरा विश्वास है कि एयर इंडिया को नए मालिक को सौंपा जाएगा, ताकि उसकी उड़ान जारी रहे। इससे पहले सोमवार को ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से खबर दी थी कि सरकार एयर इंडिया को बोली को आकर्षक बनाने के लिए एक शर्त को हटाने पर विचार कर रही है। इसके मुताबिक नए मालिक को 3.3 अरब डॉलर के एयरक्राफ्ट डेट से मुक्ति मिल जाएगी।

हवाई नियमों के उल्लंघन पर लगेगा एक करोड़ जुर्माना
संसद ने मंगलवार को वायुयान संशोधन विधेयक-2020 को मंजूरी दे दी, जिसमें नियमों के उल्लंघनों के मामले में जुर्माने की अधिकतम सीमा को वर्तमान 10 लाख रुपए से बढ़ाकर एक करोड़ रुपए कर दिया गया है। लोकसभा में यह विधेयक बजट सत्र में पारित हुआ था जबकि राज्यसभा में मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को इस विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दी गई। इस तरह इस विधेयक पर संसद की मुहर लग गई है। नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस विधेयक पर हुई चर्चा में कहा कि कुछ सदस्यों ने एटीसी कर्मचारियों की कमी का मुद्दा उठाया है, जबकि हकीकत यह है कि पिछले तीन वर्षों में 3000 एटीसी नियुक्त किए गए हैं। हवाई अड्डों के निजीकरण के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसको ऐतिहासिक परिदृश्य में देखा जाना चाहिए। वर्ष 2006 में दिल्ली और मुंबई के दो प्रमुख हवाई अड्डों का निजीकरण किया गया था और उसके परिणामस्वरूप अब तक भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को 29 हजार करोड़ रुपए का राजस्व मिल चुका है।

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