अब ताकत को लेकर राज्यपाल-ममता में तकरार

गवर्नर बोले- 'आर्टिकल 154 देखने पर मजबूर न करें'

Mamta Dhankhad
कोलकाता
पश्चिम बंगाल में राज्यपाल जगदीप धनखड़ और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच लंबे समय से तकरार चल रही है। हालांकि सोमवार को यह लड़ाई उस वक्त और तीखी हो गई जब राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 154 का उदाहरण देते हुए राज्य सरकार को चेतावनी दी है। धनखड़ ने कहा, 'मैं पिछले काफी समय से नजरअंदाज किया जा रहा हूं, ऐसा ही रहा तो मजबूरन मुझे संविधान के उस अनुच्छेद 154 को इस्तेमाल करना पड़ेगा जो कहता है कि राज्य की शक्तियां गवर्नर में निहित होंगी।'
सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में धनखड़ ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और माओवादी उग्रवाद अपना सिर उठा रहा है। दरअसल दो दिन पहले ही ममता बनर्जी ने राज्यपाल को पत्र लिखकर उनसे संविधान के दायरे में रहकर काम करने को कहा था। धनखड़ ने कानून-व्यवस्था को लेकर डीजीपी को पत्र लिखा था, जिस पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई है। ममता ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को लिखे 9 पेज के पत्र में कहा कि शक्तियों की सीमा पार कर मुख्यमंत्री पद की अनदेखी करने और राज्य के अधिकारियों को आदेश देने से दूर रहें।
राज्यपाल को लिखे अपने पत्र में ममता ने कहा, 'राज्यपाल की ओर से लगाए गए आरोपों में पुलिस और पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ बिना तथ्यों के फैसले और कटाक्ष शामिल हैं। मैं आपके पत्र और डीजीपी को लेकर की गई टिप्पणी को पढ़ने के बाद बेहद उदास और दुखी हुई हूं। साथ ही साथ इस बारे में आपके ट्विटर पोस्ट को देखकर भी दुख हुआ। अनुच्छेद 163 के अनुसार, आपको अपने मुख्यमंत्री और कैबिनेट की सहायता और सलाह के मुताबिक काम करना जरूरी है और यही हमारे लोकतंत्र का सार है। इसलिए मुख्यमंत्री की अनदेखी करने और राज्य के अधिकारियों को आदेश देने से दूर रहें।' संविधान में राज्यपाल और राज्यों के संबंधों को कई अनुच्छेदों में विस्तार से बताया गया है। संविधान के अनुच्छेद 154 के प्रावधानों के मुताबिक राज्य की कार्यपालिका की शक्ति राज्यपाल में निहित होगी। अनुच्छेद 154 (1) के मुताबिक, राज्य की कार्यपालिका की शक्ति राज्यपाल में निहित होगी और वह इसका प्रयोग इस संविधान के अनुसार स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के द्वारा करेगा।

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