प्रगति पथ पर उत्तर प्रदेश

स्वातंत्रता से लेकर आज तक या यों कहें शुरू से ही वे सब चीजें उत्तर प्रदेश में विद्यमान थी, जिन पर यदि समुचित ध्यान दिया जाता तो देश का यह सबसे बड़ा सूबा बीमारू की सूची में नहीं होता. इसका कारण पिछले लगभग साढ़े तीन दशक की वह जातिवादी, भ्रष्ट और असमाजिक तत्वों का पोषण और संरक्षण करने वाली राजनीति रही है. जिसमें राजनेताओं ने इस दृष्टिकोण से कभी काम ही नहीं किया कि समग्र राज्य का बहुआयामी विकास कैसे हो? कोई दल अपने आपको ब्राह्मण, दलित, अल्पसंख्यकों का नेता बनता रहा है, तो कोई ओबीसी, क्षत्रिय और अल्पसंख्यक वर्ग का गंठजोड़ बनाकर अपना राजनैतिक उल्लू सीधा करता रहा. लक्ष्य सिर्फ यही रहा कि येन-केन-प्रकारेण सत्ता सुख भोगते रहो और अपना और अपनों का भला करते रहो. इन दलों ने ऐसे कुख्यात तत्वों का खूब फायदा उठाया जो अपने जरायम पेशा गतिविधियों के चलते दबंगई और बाहुबल से अपने-अपने क्षेत्र की जनता पर पकड़ रखते थे. उन पर दर्ज मामलों की भरमार के बावजूद भी वे खुलेआम घूमते थे. क्योंकि उन्हें इन दलों का परोक्ष या प्रत्यक्ष संरक्षण रहता था. इन दलों ने चुनाव लड़ने की पात्रता में इस प्रावधान का जिसमें चुनाव लड़ने के लिए जरूरी अन्य बातों के अलावा सज़ायाफ्ता मुजरिम ना होना का जबरदस्त फायदा उठाया और उक्त तत्वों को धडल्ले से टिकट पा जाते थे. इस तरह धीरे-धीरे ऐसे जरायम पेशा लोग सफेदपोश नेता बन गए. अब जब ऐसे लोगों की अच्छी खासी संख्या संसद या विधानसभा में होगी तो फिर वहां कैसे काम होगा? कानून का कितना सम्मान होगा, विकास को कितनी महत्ता जायेगी सहज ही समझा जा सकता है. इनमें एकाध पर कारवाई भी इसलिए नहीं हुई कि वे मानवता के शत्रु है, जनता के सेवक नहीं, उसकी त्रासदी के कारक है. बल्कि इसलिए हुई क्योकि उन्होंने अपनी निष्ठा बदल दी थी. लम्बे समय के बाद राज्य को योगी आदित्यनाथ के रूप में एक ऐसा मुख्यमंत्री मिला है जो राज्य को एक इकाई के रूप में देखता है. और उसका वैसा ही विकास करना चाहता है. किस क्षेत्र में किस तरह के विकास को तवज्जो दी जाय, यह जानने और करने का प्रयत्न कर रहा है. धार्मिक, ऐतिहासिक स्थलों का ऐसा विकास कर रहा है जिससे लोगों का आवागमन व जानकारी बढे. जिससे उस क्षेत्र में व्यापारिक और अन्य गतिविधियां बढ़ें. जिससे लोगों को रोजगार का अवसर मिले और राज्य का राजस्व भी बढे. लोगों को आध्यात्मिक शांति मिले और सांसारिक प्रगति का भी द्वार खुले. जैसे-जैसे इन कार्यों का असर आम जनता को देखने को मिल रहा है स्वाभाविक है कि उसका झुकाव और उसका लगाव दोनों यूपी सरकार से बढ़ रहा है. जातिवाद व अपराध के प्रति नरमी और भ्रष्टाचार की गंगोत्री में गोता लगाने वाले और स्व और स्वजनों की सेवा को देश और राज्य की सेवा मानने वाले दल व नेता बेचैन है. कारण रोज उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक रही है. कानपुर काण्ड के बाद अपराधियों पर शिकंजा कसने का जो अभियान उत्तर प्रदेश में जोर-शोर से चल रहा है, सफेदपोश लिबास में नेता बनकर उसका स्वांग रचने वाले कुख्यात और दुर्दांत अपराधी और उनकी काली करतूतें जनता के सामने बेनकाब हो रही हैं. योगी राज की सख्त कारवाई उन्हें झुलसा रही है और उनकी किरकिरी हो रही है. इसमें भी जातिवादी रंग घोलने का कुत्सित कार्य स्वार्थान्ध राजनैतिक शक्तियां कर रही है. कारण आज जिन पर गाज गिर रही है, उनमे अतीत में कई जातिवादी दलों की कृपा के बदौलत देश के और राज्य की विधायिका का सदस्य रह चुके है, और अन्य पदों को भी सुशोभित कर चुके है. स्वाभाविक है उनको दर्द होगा, कारण यह सब प्राकारांतर से उनके असली चेहरे को जनता के सामने ला रहा है. इनका अस्तित्व जो पहले से ही दांव पर लगा हुआ था अब तेजी से रसातल की ओर जा रहा है. जो देश के इस सबसे बड़े सूबे की प्रगति में तब्दील होने के लिए जरूरी है. कारण राज्य की जनता योगी सरकार के विकास अभियान और राज्य को अपराध और अपराधियों से मुक्त करने के उनके अभियान के साथ ह

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