सरकारी लापरवाही से पत्रकार की मौत: पाटिल

मरीजों के इलाज को लेकर प्रशासन गंभीर नही

 मुंबई
पुणे में कोरोना संक्रमित एक निजी चैनल के पत्रकार की हुई मौत को भाजपा प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने सरकारी लापरवाही का नतीजा बताया है। उन्होंने कहा कि इस घटना से साबित होता है कि प्रशासन कोरोना के इलाज को लेकर गंभीर नहीं है। राज्य में सरकारी अस्पतालों की हालत इतनी दयनीय है कि वहां मरीज खुद को भगवान भरोसे समझता है। उन्होंने पत्रकार के परिजन को सहायता के रूप में 50 लाख रुपए देने की सरकार से मांग की है। पाटिल ने आगे कहा कि पत्रकारों का काम भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना पुलिस, डॉक्टर, नर्स, सफाईकर्मी अन्य उन लोगो का जो लोग कोरोना के विरूद्ध लड़ाई लड़ रहे है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पत्रकारों की मृत्यु पर सरकार की तरफ से उनके परिजनों को मदद नहीं मिलती है।
बुधवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए पाटिल ने भाजपा की तरफ से मृतक पत्रकार के परिजनों को पांच लाख रुपए देने की घोषणा की। इसके साथ उन्होंने राज्य सरकार से पत्रकारों को 50 लाख रुपए का बीमा कवर देने की भी मांग की। पाटिल ने राज्य की महाविकास आघाड़ी सरकार पर आरोप लगाया कि कोरोना से संक्रमित पाए जाने के बाद मरीजों को अस्पतालों में भर्ती नहीं कराया जा रहा है, जो मरीज किसी प्रकार अस्पताल में भर्ती हो गए हैं, उनके इलाज में लापरवाही बरती जा रही है। राज्य के कोरोना अस्पतालों की हालत दयनीय है। मरीजों का ठीक तरीके से इलाज नहीं हो पा रहा है, लेकिन सरकार इसे लेकर गंभीर नहीं है।
मामले की जांच के आदेश
पत्रकार पांडुरंग रायकर की कोरोना से हुई मौत मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। पुणे नगर निगम के आयुक्त विक्रम कुमार ने बताया कि मामले की जांच करने के आदेश दिए गए हैं। जिलाधिकारी राजेश देशमुख ने बताया कि उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने कार्डियक एंबुलेंस की अनुलब्धता की जांच करने के निर्देश दिए हैं। मृतक पत्रकार की बहन ने कहा कि उनका भाई आज जिंदा होता अगर समय पर कार्डियक एंबुलेंस उपलब्ध होती। उन्होंने कहा कि मेरे भाई की मौत इसलिए हुई क्योंकि समय पर एंबुलेंस नहीं मिली।
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