कोविड के बाद अदालतों में बढ़ेगी लंबित मामलों की संख्या: बोबडे

नई दिल्ली
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसए बोबडे ने शनिवार को कहा कि कोविड-19 महामारी के चलते अदालतों में बड़ी संख्या में मामले लंबित हो जाएंगे। उन्होंने कहा, इसलिए उनमें से बहुत सारे मामलों के समाधान के लिए मध्यस्थता पर अधिक बल देना होगा। प्रधान न्यायाधीश ने मानसिक स्वास्थ्य पर बल देने की जरूरत बताई और इस अप्रिय पूर्वानुमान का जिक्र किया कि कोविड संकट के बाद आत्महत्या की व्यापक प्रवृति आ सकती है।
उन्होंने एक डिजिटल कार्यक्रम में कहा, यह कोविड महामारी हमारे सामने मामलों का पहाड़ खड़ा करने जा रही है। मुझे कोई रास्ता नहीं दिखाई देता। हमें मामलों में फैसला करना होगा। इस डिजिटल कार्यक्रम में बोबडे ने शीर्ष अदालत के पूर्व शीर्ष न्यायाधीश आर भानुमति द्वारा लिखी गयी पुस्तक
ज्यूडिशियरी, जजेज एंड एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ जस्टिस का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि वह मानते हैं कि यह ऐसा वक्त है जब कई मामलों का समाधान करने के लिए मध्यस्थता, वाद पूर्व और वाद पश्चात मध्यस्थता पर बल देने की जरूरत है। उन्होंने कहा, मैं यह नहीं कह रहा कि हर मामला मध्यस्थता से निस्तारित किया जा सकता है लेकिन जब महामारी हटेगी और लॉकडाउन हटाया जाएगा तब हमारे सामने मामलों की बाढ़ आएगी। ऐसे में यदि हम विस्तृत प्रक्रिया का पालन करेंगे तो हमें नहीं पता कि कैसे हम उनका निर्णय करेंगे, यह ऐसी चीज है, जिस पर हम सभी को सोचना होगा। इस मौके पर सर्वोच्च न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश के बाद वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन वी रमना ने कहा, दूरी बनाकर रखना न्यायाधीशों पर ही निर्भर करता है। न्यायाधीश अपने बचाव में कुछ भी बोलने से संयम बरतते हैं और इन दिनों वे आलोचना के लिए आसान निशाना समझे जा रहे हैं।

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