चीन की हेकड़ी निकलना तय है

जुलाई से लेकर अब तक चीन से तीन स्तर पर लम्बी बातचीत हो चुकी है. पहले जुलाई में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर पर बात चीत हुई, उसके बाद अभी पिछले हफ्ते भारतीय रक्षा मंत्री से चीन के रक्षा मंत्री मिले और अभी गुरुवार को हमारे विदेश मंत्री से चीन के विदेश मंत्री की लंबी बातचीत हुई. हमारे तीनों मंत्रियों ने चीन के तीनों मंत्रियों से बातचीत में बेहद स्पष्ट रूप से यह बता दिया है कि सीमा पर यथास्थिति बदलने की चीन के किसी प्रयास को भारत स्वीकार नहीं करेगा. साथ ही यह भी पूरी तरह साफ़ कर दिया गया है कि भारत अपनी अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध व सक्षम है. भारत की इच्छाशक्ति को लेकर चीन को किसी भी तरह के मुगालते में नहीं रहना चाहिये. इन बातचीतों में चीन का रुख काफी नरम दिखता है. कहीं-कहीं जैसा कि रक्षा मंत्री के साथ बातचीत में दिखा कि उनके मंत्री हमारे रक्षा मंत्री से बातचीत के लिए अधीर थे. चीन की वह नरमी और शालीनता सीमा पर नजर नहीं आ रही है. जुलाई में सेना हटाने की बात पर सहमत होने के बाद भी उसने 29 और 30 अगस्त को ब्लैक टॉप पर कब्ज़ा करने की नाकाम कोशिश की और अभी भी फिंगर आठ तक के इलाके से पीछे नहीं गया है, जो कि हमारी प्राथमिक मांग है. अभी गुरुवार की बातचीत और समझौते के बाद भी उसके द्वारा विवादित क्षेत्र में सेना बल बढाने की ख़बरें सामने आ रही है और उस इलाके में उसके जवान हथियार लहराते दिख रहे है. उसके मुखपत्र 'ग्लोबल टाइम्स' द्वारा धमकी की भाषा और अनाप-शनाप प्रलाप जारी है. कुल मिलाकर चीन अब भी अपने दोहरे चरित्र और दोगलेपन का ही प्रदर्शन कर रहा है. जिसके लिए वह कुख्यात है और हमारे साथ उसने सदा ही यही नीति अपनाई है कि सामने से अच्छा बोलो और पीछे से वार करते रहों. वह कितना स्वार्थान्ध है इसका अंदाजा इसी से चल जाता है कि उसने क्कह्र्य के इलाके से चीन पाकिस्तान कॉरिडोर के तहत निर्माण किया जो हमारा है. जिस तरह लद्दाख में घुसपैठ की हिमाकत की, यह भी उसकी दोगली नीति का ही प्रदर्शन है. यह अलग बात है कि वह अब उसमें उलझ गया है, हमने उसे सामरिक और कूटनीतिक रूप से घेर लिया है और आर्थिक रूप से रोज उसे घेर रहे हैं. आज वह जान गया है कि इस बार हमसे पंगा कर उसने कुछ ज्यादा निगल लिया है, जिसे उगलना ही उसके स्वास्थ्य के लिए सही है. लेकिन यह सब आसानी से वह नहीं करनेवाला है, यह हम भी जानते हैं. इसलिए हमने अब उसे उसी की ही शैली में जबाब देना शुरू किया है. जिस तरह हमने फिंगर 4 के इलाके में अपनी स्थिति मजबूत की है और हर रोज वहां अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहे है उससे चीन बौखला रहा है. इसका जारी रहना जरूरी भी है. कारण चीन के मामले में सतत सतर्कता, तैयारी और उसके किसी भी हिमाकत का जबरदस्त और कड़ा प्रतिकार ही उसे निपटाने का सबसे सही तरीका है, जो हम हर मोर्चे पर अपना रहे है. कारण ढिलाई होते ही चिरपरिचित गद्दार कुछ भी करने की हिमाकत कर सकता है इसलिए उसे इस बार स्थायी जबाब देना जरूरी है. जब तक वह ऐसे कदम नहीं उठाता जिससे यह पूरा भरोसा हो जाय कि वह सही राह पर है. जबतक वह अप्रैल की स्थित पर वापस नहीं जाता तब तक उसके ऊपर सतर्कता और किसी भी संभावना का मुकाबला करने की तैयारी बढ़ती रहनी चाहिये. ड्रैगन के साथ हर कदम फूंक-फूंक कर रखना है, यह हमारी सेना और सरकार जान गयी है. इसलिए चीन को भी इस सच्चाई को जानकर हमसे ईमानदारी से बात करनी चाहिए, नहीं तो इस बार उसकी हेकड़ी निकलना तय है.

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