केईएम में कोरोना वैक्सीन का ट्रायल शुरू

तीन स्वयं सेवकों को लगाया गया टीका

मुंबई
हाहाकार मचा रही कोरोना महामारी स छुटकारा पाने के लिए बन रही वैक्सीन का ट्रायल केईएम अस्पताल में शुरू हो गया। शनिवार को अस्पताल में तीन स्वयं सेवकों को टीका लगाया गया। सीरम और ऑक्सफोर्ड इंस्टीट्यूट द्वारा तैयार की गई वैक्सीन का भारत में तीसरे चरण के दौरान 1600 लोगों को यह टीका दिया जाना है। पुणे में टीका लगाने की शुरुआत पहले ही हो चुकी है। बता दें कि कोरोना महामारी से जूझ रहे पूरे विश्व के लिए वैक्सीन ही सहारा है। विश्व भर में वैक्सीन का इंतजार किया जा रहा है। मनपा के केईएम अस्पताल में शनिवार को तीन स्वयं सेवकों को कोरोना वैक्सीन दी गई। स्वयं सेवकों को शनिवार की सुबह वैक्सीन देने के बाद उन्हें दोपहर तक डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया। उसके बाद उन्हें घर जाने दिया गया। इन स्वयं सेवकों को अब 29 दिन बाद फिर वैक्सीन दी जाएगी। उसके बाद तीन महीने बाद वैक्सीन दी जाएगी। आक्सफोर्ड इंस्टीट्यूट की वैक्सीन दो चरणों मे सफल परीक्षण के बाद तीसरे परीक्षण की शुरुआत हुई है। दूसरे परीक्षण के दौरान एक स्वयं सेवक को बुखार आने के बाद परीक्षण की प्रकिया कुछ दिन के लिए रोक दी गई थी, लेकिन उसके एक सप्ताह बाद दोबारा परीक्षण शुरू किया गया। आईसीएमआर से अनुमति मिलने और एथिक्स कमेटी की मंजूरी मिलने के बाद केईएम अस्पातल में वैक्सीन का परीक्षण करने की शुरुआत हुई। वैक्सीन उन्हीं लोगों को दी जाएगी, जिन्हें पहले कोरोना संक्रमण नहीं हुआ है और उनके शरीर में एंटीबॉडी तैयार नहीं हुई हो। कोव्हीशिल्ड के नाम से जाने जानी वाली इस वैक्सीन को देने लिए 350 स्वयं सेवकों के चयन किया गया है, जिनमें 160 लोगों को वैक्सीन दी जाएगी। स्वयं सेवकों का 38 से 50 लाख का बीमा किया गया है। शनिवार को तीन लोगों को वैक्सीन देने के बाद 10 और स्वयं सेवकों का परीक्षण किया जा चुका है। उन्हें रविवार को वैक्सीन दी जाएगी। कुल 160 लोगों को वैक्सीन देने में 25 दिन का समय लगने की संभावना है। मनपा अतिरिक्त आयुक्त सुरेश काकानी ने शनिवार को तीन लोगों को वैक्सीन का टीका दिए जाने की जानकारी देते हुए बताया कि 160 लोगों को टीका देने की अनुमति मिली है, लेकिन 100 लोगों को ही टीका दिया जाएगा। बकाया लोगों को प्लासिबो दिया जाएगा, इसकी जानकारी हमें भी नहीं होगी । प्लासिबो टीका रखने के पीछे तुलनात्मक परीक्षण करने में आसानी होती है। एक समय के बाद सभी की जांच की जाएगी, जिसमें यह पता चलेगा कि स्वयं सेवक में कितनी एंटीबॉडी तैयार हुई है। पूरे विश्व में 80 कंपनियां वैक्सीन बनाने के तीसरे चरण में पहुंची है।
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