पंचायत चुनाव यूपी का सियासी पारा चढ़ा

गोरखपुर
पंचायत चुनाव के लिए युवाओं को लुभाने और अपने खेमे में करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इन दिनों फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर इन पोस्टर की भरमार है। पंचायत चुनाव की अधिसूचना और औपचारिक घोषणा भले न हुई हो लेकिन गांवों में सरगर्मियां बढ़ने लगी हैं। खेमेबाजी और जोड़तोड़ की कोशिशों की राह तकनीक और सोशल मीडिया ने कुछ हद तक आसान कर दी है। व्यक्तिगत फेसबुक अकाउंट के साथ ही क्षेत्र या संगठन विशेष के नाम पर फेसबुक पेज और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिये लोगों को जोड़कर अपने पाले में करने की होड़ मची हुई है। इनमें युवा प्रत्याशी और समर्थक ज्यादा सक्रिय दिख रहे हैं। प्रभाव और प्रभुत्व के प्रदर्शन के लिए प्रत्याशी तरह-तरह की तरकीबें आजमा रहे हैं। मुख्यमंत्री, सांसद और विधायक से लेकर दबंग चेहरों के साथ खिंचवाई फोटो भी पोस्ट कर रहे हैं। इन तस्वीरों का व्हाट्सएप और फेसबुक की प्रोफाइल पिक्चर के तौर पर भी खूब इस्तेमाल हो रहा है। युवा नेता अनमोल प्रताप कहते हैं कि सोशल मीडिया ने प्रचार आसान कर दिया है। अगर आपकी पोस्ट लगातार चल रही है तो क्षेत्र में युवाओं के बीच आपकी पहचान आसानी से बन जाती है।
सोशल मीडिया के बढ़ते क्रेज के बीच अर्पित मिश्रा, विनायक अग्रहरी और अनुराग शाही सरीखे कई युवा पोस्टर और वीडियो बनाने से लेकर इसे पोस्ट करने तक की जिम्मेदारी ले रहे हैं। डिमांड के मुताबिक रोजाना पोस्टर व वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं। इसके लिए संबंधित व्यक्ति को सिर्फ अपनी तस्वीर और तय रकम देनी होती है। ग्राम प्रधान से लेकर सांसद तक और विभिन्न चुनावों के उम्मीदवार भी इनकी मदद ले रहे हैं। विनायक अग्रहरी बताते हैं कि 50 से 100 रुपये तक में एक पोस्टर बनाते हैं। ज्यादा फोटो इस्तेमाल होने पर कीमत बढ़ जाती है। एक हजार रुपये में पूरे महीने का पैकेज देते हैं। अर्पित ने बताया कि अच्छा पोस्टर बनाने के लिए स्टाइलिश फॉन्ट का खास रोल होता है। इसके लिए एप का 865 रुपये प्रतिवर्ष का पैकेज ले रखा है। इसी तरह और भी खर्च होते हैं। पोस्टर बनाने के साथ ही पूरे महीने पोस्ट करने का पैकेज 1599 से 1999 तक का है। अर्पित ने बताया कि पंचायत चुनाव के प्रत्याशी पोस्टर के साथ वीडियो भी बनवा रहे हैं। पांच मिनट के सामान्य वाीडियो की कीमत तीन सौ रुपये है। हालांकि कई ग्राम प्रधान अपने विकास कार्यों का वीडियो भी बनवा रहे हैं। इसके लिए उनके गांव में जाकर वीडियो तैयार करना होता है। इसकी कीमत चार हजार रुपये है। अर्पित ने बताया कि उन्होंने हाल ही में खोराबार, बांसगांव और पिपराइच इलाके के कुछ प्रधानों के गांव में वीडियो तैयार किया है।

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