मनाली देगा स्वर्ग सा आनंद

Manali
हिमाचल प्रदेश में स्थित मनाली एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। बर्फ से भरे रोहतांग दर्रे के चारों ओर गर्म पानी के झरने पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। प्रकृति प्रेमियों और रोमांच पसंद करने वाले लोगों के लिए मनाली में घूमने की कई सारी जगहें हैं। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू ज़िले में मनाली स्थित रोहतांग अटल टनल रोहतांग दस साल की कड़ी मेहनत के बाद बनकर तैयार हो गया है। समुद्र तल से 3,000 मीटर (10,000 फीट) की ऊंचाई पर बनाई गई 9 किलोमीटर लंबी इस सुरंग का डिजाइन ऑस्ट्रेलियाई कंपनी स्नोई माउंटेन इंजीनियरिंग कंपनी ने तैयार किया है। 
 इतनी ऊंचाई पर बनी यह दुनिया की सबसे लंबी सुरंग है। वर्ष 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस परियोजना की घोषणा की थी। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस टनल का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 सितंबर को कर सकते हैं। हालांकि, तारीख की घोषणा होना अभी बाकी है। 
पीर पंजाल की पहाड़ियों को काटकर बनाई गई सुरंग के कारण लेह और मनाली के बीच की दूरी 46 किलोमीटर कम हो गई है। वहीं मनाली वैली से लाहौल और स्पीति वैली तक पहुंचने में करीब 5 घंटे का वक्त लगता है, जो अब करीब 10 मिनट में पूरा हो जाएगा। साथ ही यह लाहौल और स्पीति वैली के लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जो भारी बर्फबारी के दौरान हर साल सर्दी में करीब छह महीने के लिए देश के शेष हिस्से से कट जाता था। 

 हिडिम्बा मंदिर - यह मंदिर महाभारत के पाडंवों में से एक भीम की पत्नी हिडिम्बा देवी को समर्पित है। डूंगरी पार्क में स्थित इस मंदिर को 1553 में लकड़ी और पत्थरों से बनाया गया है। इस मंदिर का डिजाइन में शिवालय आकार की छत और नक्काशीदार प्रवेश द्वार शामिल है, जो हिंदू देवताओं और प्रतीकों से अलंकृत है। यहां भीम और हिडिम्बा के पुत्र घटोत्कच की पूजा एक पवित्र वृक्ष के रूप में की जाती है। 
वशिष्ठ- यह गांव ब्यास नदी के किनारे स्थित है, जो मनाली से सिर्फ 3 किलोमीटर की दूरी पर है और यह अपने सल्फर के सोते के लिए मशहूर है। कहा जाता है कि लक्ष्मण ने इस इसी भूमि में तीर चलाकर इस सोते को बनाया था। यहां आसपास दो मंदिर है जो राम और ऋषि वशिष्ठ को समर्पित है। 
मणिकर्ण- पार्वती नदी की दायीं ओर स्थित मणिकर्ण अपने गर्म पानी के झरने के लिए प्रसिद्ध है। यह झरना अपने चिकित्सकीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है। यहां हर साल लाखों हिंदू और सिख श्रद्धालु आते हैं और झरने में डुबकी लगाते हैं। इस स्थल के बारे में कहा जाता है कि एक विशाल सर्प ने भगवान शिव की पत्नी पार्वती की बाली चुरा ली और यहां मैदान के बाहर फेंक दिया था। शहर में गुरू नानक जी का एक विशाल गुरुद्वारा स्थित है, जिसका निर्माण 1940 में संत बाबा नारायण हर जी ने किया था। इसके समीप ही रघुनाथ मंदिर और नैनी देवी मंदिर भी स्थित है। 
सोलंग घाटी- मनाली से लगभग 13 किलोमीटर दूर स्थित खूबसूरत सोलंग वैली एडवेंचर, खेल और स्कीइंग के लिए बेहद मशहूर है। सोलंग घाटी ब्यास नदी और सोलंग विलेज के बीच में स्थित है। यहां से बर्फ से ढंके पहाड़ और ग्लेशियर का खूबसूरत नज़ारा दिखाई देता है। गर्मियों में यहां पैराग्लाइडिंग, ज़ोरबिंग (चक्र), माउंटेन बाइकिंग (पहाड़ो पर बाइक चलाना) और घुड़सवारी का लुत्फ उठा सकते हैं। सर्दियों के मौसम में विशेषकर जनवरी और मार्च के बीच में यहां स्कीइंग, स्नोबोर्डिंग और स्लेजिंग का भी आनंद उठा सकते हैं। 
रोहतांग पास- समुद्रतल से 3,979 मीटर की ऊंचाई पर स्थित और बर्फ से ढंका रहने वाला यह दर्रा (पास) लेह राजमार्ग पर स्थित है। यह पास प्रत्येक वर्ष केवल जून से अक्टूबर माह में खुला रहता है। यहां से ग्लेशियर, हिमालय की चोटियां और नदी का खूबसूरत दृश्य दिखाई देता है। लाहौल, स्पीति, पांगी और लेह जाने का यह प्रवेशद्वार है। 
नग्गर- मनाली से 21 किलोमीटर दूर और ब्यास नदी की बायीं ओर स्थित नग्गर, कुल्लू की पुरानी राजधानी हुआ करता था। इसकी स्थापना राजा विशुद्पाल द्वारा की गई थी। यहां का मुख्य आकर्षण एक किला है, जिसे हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम ने हेरिटेज होटल में बदल दिया है। पश्चिमी हिमालय वास्तुशैली के बेहतरीन नमूने वाले इस इमारत में कभी कुल्लू के शासक रहा करते थे। यह इमारत लकड़ियों और पत्थरों से बना है और इसकी खिड़कियां और दरवाजों पर नक्काशी की गई है। नग्गर में एक मशहूर रूसी चित्रकार निकलाय रेऱिख का घर भी था, वे यहां 1929 तक रहे और 1947 में उनकी मृत्यु हो गई। अब उनके घर को एक आर्ट गैलरी में बदल दिया गया है। इस गैलरी में हिमालय पर्वत श्रंखला से जुड़े रंगीन चित्रों को प्रदर्शित किया जाता है। 

Post a comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget