महागठबंधन में छोटे दलों की बड़ी मांग

पटना
बिहार विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे का अंतिम अध्याय लिखा जा रहा है। महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसका भान होते ही हिंदुस्तानी अवाम मोचा के प्रमुख जीतनराम मांझी अलग हो चुके हैं। दरअसल, राष्ट्रीय जनता दल व कांग्रेस की ओर से छोटी पार्टियों को खास तवज्जो नहीं मिल रहा है। महागठबंधन में एक खास रणनीति के तहत छोटी पार्टियों को उनकी औकात बताने की कोई कसर नहीं छोड़ रखी गई है। राष्ट्रीय लोक समता पार्टी , विकासशील इनसान पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी , मार्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और भाकपा माले को सीटों को लेकर चिरौरी करनी पड़ रही है।
सीपीआइ व सीपीएम ने आरजेडी को सौंपी अपनी सूची
चुनाव से पहले आरजेडी और कांग्रेस के रुख से आरएलएसपी, वीआइपी और वामपंथी दलों के नेताओं की धड़कनें तेज हो गईं हैं।
आरजेडी से सीपीआइ व सीपीएम की दो दौर की बातचीत हो चुकी है। भाकपा माले के नेता अकेले में आरजेडी नेताओं से तीन बार मिल चुके हैं। सीपीआइ व सीपीएम ने जिन 45 सीटों पर चुनाव लड़ने की इच्छा प्रकट की है, उसकी सूची आरजेडी को सौंप दी है। इन्हें कितनी सीटें दी जाएंगी, इस बारे में आरजेडी के शीर्ष नेतृत्व ने सीपीआइ व सीपीएम के पोलितब्यूरो को बताया दिया है।
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