अक्टूबर के पहले सप्ताह में अंतिम वर्ष की परीक्षा

परीक्षा में बैठेंगे सात लाख 92 हजार 385 छात्र

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मुंबई
अंतिम वर्ष परीक्षा को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद राज्य की महाविकास आघाड़ी सरकार ने परीक्षा कराने को लेकर कदम उठाए हैं। सोमवार को राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री उदय सामंत ने कहा कि अंतिम वर्ष की परीक्षाएं अक्टूबर के पहले सप्ताह में आयोजित की जाएगी। अंतिम वर्ष के छात्र अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा घर बैठे दे सकेंगे। ये परीक्षाएं कम अंकों की होगी। अंतिम वर्ष की परीक्षाओं के परिणाम कुछ विश्वविद्यालय 31 अक्टूबर तक घोषित कर देंगे, जबकि बाकी के विश्वविद्यालय 10 नवंबर तक रिजल्ट की घोषणा करेंगे। राज्य सरकार अंतिम वर्ष की परीक्षा 30 सितंबर तक के बजाय 30 अक्टूबर तक लेने की अनुमति के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पास प्रस्ताव भेजेगी। इस परीक्षा में 7 लाख 92 हजार 385 छात्र बैठेंगे।
सामंत ने कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में बुधवार को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की मांग के अनुसार अंतिम वर्ष की परीक्षा 31 अक्टूबर तक कराने के लिए यूजीसी से समय मांगने के प्रस्ताव को मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद यूजीसी के पास 31 अक्टूबर तक परीक्षा लेने की अनुमति देने संबंधी प्रस्ताव भेजा जाएगा। सामंत ने कहा कि छात्रों को परीक्षा देने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा। इसलिए विद्यार्थी सितंबर महीने भर में परीक्षा की तैयारी करें।
सामंत ने कहा कि छात्रों के मन में शंका है कि परीक्षा कब शुरू होगी। हमने पहले ही कहा था कि छात्रों को परीक्षा की तैयारी करने के लिए समय दिया जाएगा, इसी के तहत सितंबर का पूरा महीना छात्रों को अध्ययन के लिए दिया जाएगा और परीक्षा अक्टूबर के पहले सप्ताह में आयोजित की जाएगी। कुछ विश्वविद्यालय 31 अक्टूबर तक परिणामों की घोषणा करेंगे और कुछ विश्वविद्यालय 10 नवंबर तक परीक्षा के नतीजे घोषित करेंगे। इस दौरान सामंत ने सभी विश्वविद्यालयों से दोबारा अनुरोध किया कि छात्रों को किसी प्रकार की शारीरिक और मानसिक परेशानियां नहीं होनी चाहिए। इसके लिए पेंडणेकर समिति अच्छी तरह अपना काम करें। परीक्षा कैसे आयोजित की जाएगी, यह तय करने के लिए बुधवार को शाम चार बजे एक बैठक आयोजित की जाएगी। उसके बाद एक और प्रस्ताव सरकार को प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ कुलपति ने सहमति व्यक्त की है कि छात्रों को घर से बाहर नहीं जाना चाहिए। कोरोना संकट में 7 लाख 92 हजार 385 छात्रों की परीक्षा लेना बहुत कठिन काम है।
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