खतरे में इमरान और जिनपिंग की कुर्सी

पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल बाजवा की विशेष बैठक में उनके मुंह पर पाकिस्तानी विपक्षी दलों के नेताओं और विशेषकर बिलावल भुट्टो और पूर्व प्रधानमन्त्री नवाज शरीफ के भाई द्वारा सेना को खरी-खरी सुनाने के बाद, भले ही उसका सेना प्रमुख बाजवा ने सख्त प्रतिकार किया. एक बात अवश्य साबित होती है कि अब पाकिस्तान का विपक्ष सेना और उसके समर्थन से पाक की सत्ता पर काबिज इमरान सरकार से आजिज है, और आगे चलकर इस गठजोड़ के खिलाफ देश में एक बड़ा आन्दोलन शुरू होने की प्रबल संभावना बन गयी है. जिसका आगाज भी नवाज शरीफ ने अपने आक्रामक तेवर से कर दिया है. दुनिया में शासन प्रमुख का निर्देश सेना मानती है, जबकि पाकिस्तान में सरकार का मुखिया सेना प्रमुख से निर्देश लेता है. पाकिस्तान में उल्टी गंगा का बहना ही वह बात है जो वहां व्याप्त अराजकता का सबसे बड़ा कारक है. हर निर्णय के लिए नागरिक सरकार को सेना का मुख देखना पड़ता है. वहां निर्णय यह देख कर नहीं लिया जाता कि उसमे जनता और देश का कितना हित है, बल्कि यह देख कर लिया जाता है कि इससे सेना का कितना हित है. उसके हाथों में शक्ति निहित होने के नाते वे जिसे चाहते है उसे सत्ता पर बिठाते है, और जब चाहते है तब उतार देते है. जो भी नेता साा में आए, चाहे वह कितने बड़े जनाधार वाला क्यों न हो, सेना और उसकी खुफ़िया एजेंसी की कठपुतली ही होता है. इमरान जैसे नेता हर एक सांस उनके रहमोंकरम पर ले रहे है और नवाज शरीफ जैसे प्रधानमन्त्री चाह कर भी हमारे साथ रिश्ते सही नहीं कर सके, अलबत्ता उन्हें अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी. आज यह आतंकवाद का मक्का है. अपनी ही रियाया पर अत्याचार करने में इसका कोई शानी नहीं है. अपनी संप्रभुता को इसने चीन जैसे कुटिल देश के सामने गिरवी रख दिया है. अब चीन को डर है कि उसने पीओके जो हमारी जमीन है और जिस पर पाक का अवैध कब्जा है और जहाँ चीन ने सारी अंतरराष्ट्रीय मान्यताओं, कानूनों, और परम्पराओं को अनदेखा करते हुए सीपीइसी के तहत निर्माण कार्य किये है, काफी धन लगाया है हम उस पर क़भी भी कब्जा कर सकते हैं. क्योंकि वह हमारा है, इसलिए वह पाकिस्तान चढ़ा रहा है कि वह उसकी सुरक्षा के लिए कदम उठाये. इसलिए पाक गिलगिट-बल्टिस्तान में चुनाव कराने और नया राज्य बनाने की कवायद कर रहा है. जिसमे मुख्य भूमिका सेना प्रमुख बाजवा निभा रहे है, और नेताओं की बैठक बुला रहे है. मतलब किस तरह पाक का पूरा राजनीतिक महकमा उनके सामने सजदा करता है, इसको पूरी दुनिया को दिखा रहे हैं और जो नेता इस आपत्तिजनक रवैय्ये के विरोध में अपना मत व्यक्त कर रहे है, उन्हें हडका रहे है. चीन खुश रहे इसके लिए कुछ भी करने की तैयारी पाकिस्तान की बदहाल आवाम को उसके खिलाफ कर रहा है. पकिस्तान में जगह-जगह वह आक्रोश दिख भी रहा है. बाजवा जो चीनी टैंक पर खड़े होकर हमारे खिलाफ विष वमन कर अपनी शूरवीरता का ओछा प्रदर्शन कर स्वयं ही आनंदित होते रहते हैं. उन्हें अपने पहले के पाक सेनाध्यक्षों की और अपनी शूरवीरता की उन मिसालों को नहो भूलना चाहिए जब भारतीय सेना ने उनके छक्के छुड़ाये हैं. उरी और बालाकोट की सर्जिकल स्ट्राइक के समय उनके जैसा शूरवीर ही पाक सेना का नेतृत्व कर रहा था. कब भारतीय प्लेन गये, कब उनके पाप की दुनिया मटियामेट हो गयी उन्हें पता ही नहीं चला और आज तक उसका डर सता रहा है. चीन वैसे भी घटिया माल और हथियार निर्माण करने में दुनिया में कुख्यात है. उसके बल पर ज्यादा उछल-कूद अच्छा नहीं, इतना तो बजावा भी जानते है कि सीमा पर हमने चीन का क्या हाल किया है और उसके मंसूबो पर किस तरह पानी फेर रहे हैं. इसलिए वह अपनी और अपने इमरान की कुर्सी बचाएं. हमारी चिंता हम कर लेंगे. कारण हम उनकी और उनके आका चीन की शूरवीरता से अच्छी तरह परिचित हैं. दोनों गद्दार है और छुप कर वार करते है, अब हमने भी ऐसे गद्दारों को झेलने और निपटाने में पारंगतता हासिल कर ली है, जिससे इमरान और जिनपिंग दोनों की कुर्सी हिलती नजर आ रही है.

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