जर्जर इमारतों पर मनपा की कार्रवाई तेज

सायन-कोलीवाड़ा की पंजाबी कॉलोनी को सोमवार से खाली कराया जाएगा

Punjabi Colony Sion
मुंबई
मानसून खत्म होते ही मनपा की ओर से जर्जर इमारतों पर कार्रवाई तेज हो गई है। मनपा ने पिछले दिनों गिरी इमारतों खासकर भिवंडी में हुए हादसे को देखते हुए जर्जर घोषित इमारतों को खाली कराकर उन्हें गिराने की कार्रवाई तेज कर दी है। सायन-कोलीवाड़ा में पंजाबी कॉलोनी की जर्जर इमारतों को खाली कराने की कार्रवाई सोमवार से शुरू होगी। यह जानकारी 'एफ' नार्थ के सहायक आयुक्त गजानन बेल्लाडे ने दी। उन्होंने कहा कि इन इमारतों का मामला कोर्ट में लंबित था। कोर्ट से अब इन इमारतों को खाली कराने की अनुमति मिली है। हम लोगों की जान से खिलवाड़ नहीं कर सकते, जिसके चलते इमारतों को खाली कराने की कार्रवाई की जाएगी। बेल्लाडे ने बताया कि जिन इमारतों का कोर्ट में मामला लंबित है, उन्हें भी खाली कराने के लिए कोर्ट में निवेदन किया गया है। मनपा सहायक आयुक्त ने कहा कि इमारतों को खाली कराकर उसे ढहाने का काम किया जाएगा। बता दें कि लगभग 70 साल से भी अधिक पुरानी सायन-कोलीवाड़ा की पंजाबी कॉलोनी की इमारतें इतनी जर्जर हो चुकी है कि पिछले तीन सालों में इमारतों का हिस्सा कई बार गिर चुका है। इमारत जर्जर होने के बावजूद जमीन के मालिकाना को लेकर मामला लटका हुआ था। अब जमीन का मालिकाना सोसायटी को मिलने के बावजूद विकास की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई। बेल्लाडे ने कहा कि पंजाबी कॉलोनी की कुल 25 इमारतों में 14 इमारतों का पहले ही पानी और बिजली का कनेक्शन काट दिया गया है। बाकी इमारतों का पानी और बिजली कनेक्शन 24 तारीख से काटा जाना था, लेकिन भारी बारिश के कारण काम रोकना पड़ा। उन्होंने बताया कि 28 सितंबर से बाकी इमारतों का पानी और बिजली कनेक्शन काटा जाएगा। सोमवार को चार इमारत का पानी और बिजली का कनेक्शन काटा जाएगा। उसके बाद 30 सितंबर को भी चार इमारतों का पानी और बिजली का कनेक्शन काटा जाएगा। बकाया इमारतों का 3 अथवा 4 अक्टूबर को बिजली-पानी कनेक्शन काटा जाएगा। मनपा सहायक आयुक्त ने बताया कि बिल्डिंग नंबर 18 का मामला बंबई हाई कोर्ट में है, जिस पर से पिछले सप्ताह तोड़क कार्रवाई को लेकर लगाई रोक हटा दी है। गजानन बेल्लाडे ने कहा कि खाली कराई गई इमारतों को तोड़ने की कार्रवाई अक्टूबर में शुरू होगी।
वर्ष 1950 में बसी थी पंजाबी कॉलोनी

पंजाबी कॉलोनी को सन 1950 के आसपास भारत सरकार ने करीब 12 एकड़ भूखंड पर बसाया था। कुल 25 बिल्डिंगें बनाई गई थीं। करीब 1200 किराएदार थे। धीरे-धीरे बिल्डिंग जर्जर अवस्था में जाती रही, लेकिन डिवेलपमेंट नहीं हुआ। इसका कारण बताते हैं कि इस जमीन का मालिकाना हद राष्ट्रपति के नाम पर था। पिछली सरकार में राजस्व मंत्री रहते हुए एकनाथ खडसे ने यहां के लोगों को मालिकाना हक दिलाने व इस क्षेत्र के विकास के लिए एक समिति गठित की थी। अब जाकर इन्हें मालिकाना हक मिलने लगा है। मुंबई शहर जिले के कलेक्टर राजीव निवतकर कहते हैं कि पंजाबी कॉलोनी की 25 बिल्डिंगों में से 17 बिल्डिंगों का मालिकाना हक सोसायटी को दे दिया है। छह बिल्डिंगों की सोसायटी को मालिकाना हक देने का काम चल रहा है और दो बिल्डिंग के कांगजों की जांच-पड़ताल चल रही है। वे कहते हैं पंजाबी कॉलोनी का अब कलेक्टर से कोई लेना-देना नहीं है। विकास के लिए जिसे चाहे नियुक्त करें। विकास करने के जर्मनी और हांगकांग के विकासक आए, लेकिन कोई सफल नहीं हुआ। लोग कहते हैं कि पिछले 15-20 साल से कई सारे धुरंधर से धुरंधर बिल्डर आए। यहां की इमारतों में रहने वालों को कुछ बिल्डरों ने टीवी दिया तो किसी ने पैसे दिए, लेकिन मामला जस का तस बना रहा।

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