५० फीसदी सेनेटाइजर घटिया दर्जे का

मुंबई
कोरोना महामारी में बचाव के लिए कारगर सेनेटाइजर में अब धांधली भी खूब होने लगी है। मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे सहित राज्य में उपयोग किए जाने वाला 50 प्रतिशत सेनेटाइजर निकृष्ट दर्जे के हैं। कंज्यूमर गाइडेंस सोसायटी ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है।
उल्लेखनीय है कि कोरोना महामारी से बचने के लिए सेनेटाइजर और मास्क दो सबसे महत्वपूर्ण चीजे हैं। सेनेटाइजर बनाने को लेकर जिस तरह का छोटी-छोटी कंपनियां आ गई हैं, उनमें गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सेनेटाइजर बनाने के दौरान उसमें 60 प्रतिशत अल्कोहल होना आवश्यक है, लेकिन कमाई करने के लिए कंपनियां लोगों की जान से खिलवाड़ कर रही हैं। कंज्यूमर्स गाइडेंस सोसाइटी ऑफ इंडिया ने सेनेटाइजर की जांच करने का निर्णय लिया। मार्केट में उपलब्ध 122 सेनेटाइजर को लेकर उनकी जांच की गई। इन 122 सैम्पलों में 50 प्रतिशत सैम्पल अपने मानक में खरे नहीं उतरे है। हालात यह है कि कुछ सेनेटाइजर में तो विषैले मिथनॉल का उपयोग किए जाने की जानकारी सामने आई। मिथनॉल से शरीर पर गंभीर परिणाम हो सकता है। यहां तक कि आंख में चले जाने पर आंख खराब हो जाने का भी खतरा बना रहता है। जांच में यह सामने आया कि कुल 122 सैंपल की बोतलों में से 45 सैंपल की बोतलों पर जो लिखा था, वह बोतल में भरे सेनेटाइजर से मेल नहीं खा रहा था। 12 सेनेटाइजर में किसी तरह का द्रव्य मेल नहीं खा रहा था। मिथनॉल से बने सेनेटाइजर के उपयोग से सिरदर्द, चक्कर, उल्टी आना और धुधला दिखाई देता है। सेनेटाइजर से हाथ में छाले जैसी समस्या दिखाई देने लगी है। कोरोना के संकट काल में इस तरह किए जा रहे गैर व्यवहार को लेकर कठोर कार्रवाई किए जाने की चेतावनी सीजीएसआई के सचिव मनोहर कामत ने दी है।
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