पीएम मोदी सहित हजारों दिग्गजों की जासूसी

नई दिल्ली
सीमा पर घुसपैठ की कोशिश में जुटा चीन देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति से लेकर मुख्यमंत्रियों, सांसदों, खिलाड़ियों, बॉलीवुड कलाकारों और उद्योगपतियों तक हजारों लोगों की जासूसी करा रहा है। इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट में इस साजिश का खुलासा करते हुए बताया है कि चीनी सरकार और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ी टेक्नॉलजी कंपनी जेनहुआ डेटा इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलजी के जरिए यह जासूसी कराई जा रही थी। आखिर चीन ने किस तरह की टेडा का कलेक्शन किया है? हाईब्रिड वारफेयर के क्या मायने हैं? और चिंता की बात क्या है? आइए इन सवालों के जवाब जुटाने की कोशिश करते हैं।
घरेलू सुरक्षा एजेंसियां कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस तरह की डेटा का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन विदेशी ताकतें इस डेटा का कई उद्देश्यों से इस्तेमाल कर सकती हैं। जानबूझकर सामरिक पैंतरेबाज़ी के लिए व्यापक रूप से सहज ज्ञान युक्त जानकारी को एक व्यापक ढांचे में एक साथ रखा जा सकता है। छोटी और अहितकर समझी जाने वाली जानकारियों को एकत्रित करके भी सामरिक छल के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। जासूसी करने वाली कंपनी जेनहुआ खुद इसे हाईब्रिड वारफेयर बताती है।
घरेलू सुरक्षा एजेंसियां कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस तरह की डेटा का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन विदेशी ताकतें इस डेटा का कई उद्देश्यों से इस्तेमाल कर सकती हैं। जानबूझकर सामरिक पैंतरेबाज़ी के लिए व्यापक रूप से सहज ज्ञान युक्त जानकारी को एक व्यापक ढांचे में एक साथ रखा जा सकता है। छोटी और अहितकर समझी जाने वाली जानकारियों को एकत्रित करके भी सामरिक छल के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। जासूसी करने वाली कंपनी जेनहुआ खुद इसे हाईब्रिड वारफेयर बताती है।

क्या है जेनहुआ डेटा का काम?
चीन की यह टेक्नॉलजी कंपनी राजनीति, सरकार, कारोबार, प्रौद्योगिकी, मीडिया और सिविल सोसायटी को टारगेट करती है। चीनी इंटेलिजेंस, मिलिट्री और सिक्यॉरिटी एजेंसियों के साथ काम करने का दावा करने वाली कंपनी जेनहुआ सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स और अन्य डिजिटल माध्यमों से डेटा जुटाती है और इन्फॉर्मेशन लाइब्रेरी तैयार करती है, जिनमें ना केवल न्यूज सोर्स, बल्कि फोरम, पेपर, पेटेंट, बिडिंग डॉक्युमेंट्स और यहां तक की रिक्रूटमेंट का कॉटेंट शामिल होता है। दरअसल, डेटा नहीं बल्कि इसके रेंज और इस्तेमाल को लेकर चिंता है। जेनहुआ की ओर से टारगेट व्यक्तियों और संस्थाओं के सोशल मीडिया अकाउंट्स से सभी जानकारियां एकत्रित कर ली जाती हैं।

क्या है हाईब्रिड वारफेयर?
1999 की शुरुआत में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने अप्रतिबंधित युद्ध के रूप में हाइब्रिड वॉरफेयर की रूपरेखा तैयार की, जिसने सैन्य युद्ध को राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी रूप से बदल दिया। देश के भीतर राजनीतिक पार्टियां भी विपक्ष को टारगेट करने के लिए इन टूल्स का इस्तेमाल करती हैं। हाइब्रिड वॉर वास्तव में छद्म युद्ध है। जिसमें दुश्मन को साइबर और मनोवैज्ञानिक दांवपेंच से हराया जाता है। इसके तहत जनता की सोच को बदला जाता है। अफवाहें और फेक न्यूज के जरिए अपने मंसूबों को पूरा किया जाता है।

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