जल और वायु के उचित प्रयोग से योग बढ़ाता है आयु

Yoga

जल और वायु का परिवर्त नहमारे शरीर के प्राकृ तिक ढां चे को बिगाड़ सकता है। फिर चाहे आप कितने ही पोषक तत्व खाएं या कितने ही योग आसन करें शरीर अस्वस्थ ही रहेगा। शरीर और मन के बीच की कड़ी है प्राणायाम। प्राणायाम है सृष्टि की वायु और आयु। दूसरी ओर शरीर और प्राण के बीच की कड़ी है जल। अर्थात भोजन और वायु के बीच की कड़ी है जल, जो व्यक्ति अपना जल और वायु शुद्ध तथा पुष्ट रखता है वह निरोगी रहकर दीर्घायु जीवन व्यतीत करता है। तो भोजन कम खाएं, जल ज्यादा पीएं और वायु जल से दोगुनी ग्रहण करें। 

 जल ही जीवन है
 कुछ घंटे जल न पीएं और सर्वप्रथम शरीर का जल सूखा दें। फिर जल न कम पीएं और न ही अत्यधिक। जल से जहां हमारे शरीर के दूषित पदार्थ बाहर निकल जाते हैं वहीं यह हमारे चेहरे की कांति बनाए रखता है। अशुद्ध जल से लीवर और गुर्दों का रोग हो जाता है। यदि उक्त दोनों में जरा भी इंफेक्शन है तो इसका असर दिल पर भी पड़ता है। लगभग 70 प्रतिशत रोग जल की अशुद्धता से ही होते हैं। तो जल को जीवन में महत्व दें। कहीं का भी जल ना पीएं। जल पीते वक्त सावधानी रखेंगे तो भोजन और प्राण में इसका भरपूर लाभ मिलेगा। जल योग के संबंध में योग में बहुत कुछ लिखा है उसे जानें। 
प्राणायाम का लाभ 
 खुली और शुद्ध ताजा हवाएं हमारे मन को प्रसन्न कर देती हैं। शुद्ध हवा फेफड़ों को मजबूत बनाती है तथा रक्त के सुचारु रूप से संचालन और शुद्धिकरण होते रहने से दिल भी स्वस्थ बना रहता है। इससे सभी प्रकार की नाड़ियों को स्वास्थ्य लाभ मिलता है साथ ही नेत्र ज्योति बढ़ती है। अनिद्रा रोग में लाभ मिलता है और शरीर तनाव मुक्त रहकर फूर्तिला बनता है। 

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