मोदी ने श्रीलंका में अल्पसंख्यक तमिलों के लिये सत्ता में भागीदारी की हिमायत की

नयी दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को श्रीलंका की नई सरकार द्वारा संवैधानिक प्रावधानों के पूर्ण क्रियान्वयन पर जोर दिया जिससे अल्पसंख्यक तमिल समुदाय की सत्ता में साझेदारी सुनिश्चित हो। उन्होंने द्विपक्षीय बौद्ध संबंधों को बढ़ावा देने के लिये द्वीपीय राष्ट्र को 1.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर के अनुदान की भी घोषणा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के बीच द्विपक्षीय डिजिटल शिखर सम्मेलन के दौरान यह मुद्दा उठा। अपने नए कार्यकाल के लिये राजपक्षे ने पिछले महीने ही कार्यभार संभाला है। संसदीय चुनावों में उनकी पार्टी को दो तिहाई से
ज्यादा मत मिले थे। करीब एक घंटे तक चली वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने नौवहन सुरक्षा सहयोग को और बढ़ाने, व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने तथा कोलंबो बंदरगाह पर भारत और जापान की सहभागिता वाले ईस्ट कंटेनर टर्मिनल (ईसीटी) के क्रियान्वयन पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (हिंद महासागर क्षेत्र) अमित नारंग ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, 'राजपक्षे के साथ वार्ता में मोदी ने श्रीलंका के संविधान के 13वें संशोधन को लागू करने पर जोर दिया और कहा कि शांति एवं सुलह की प्रक्रिया के लिये यह जरूरी है'।
उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने श्रीलंका की नई सरकार से एकीकृत श्रीलंका के तहत संवैधानिक प्रावधानों को लागू कर पोषित समानता, न्याय, शांति और गरिमा के साथ रहने की तमिलों की आकांक्षाओं को साकार करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया। श्रीलंका के संविधान का 13वां संशोधन द्वीपीय देश में तमिल समुदाय के लिये सत्ता में भागीदारी की बात करता है। भारत इसे लागू करने के लिये जोर देता रहा है जो 1987 के भारत-श्रीलंका समझौते के बाद लाया गया। बातचीत के दौरान भारत ने कोलंबो बंदरगाह पर ईसीटी परियोजना का मुद्दा भी उठाया क्योंकि क्रियान्वयन के समझौते पर लगभग हस्ताक्षर होने के बाद श्रीलंका की सरकार ने इसे रोक दिया था। भारत और जापान द्वारा क्रियान्वित की जा रही परियोजना के बारे में पूछे जाने पर नारंग ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने उम्मीद जताई कि नई सरकार इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिये शीघ्र और निर्णायक कदम उठाएगी। यह शिखर वार्ता करीब करीब एक घंटे तक चली।

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