संतोष ने खोले कई राज

लखनऊ
पशुपालन विभाग में आटे की सप्लाई के नाम पर हुए करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े में गिरफ्तार संतोष मिश्र ने सचिवालय के अंदर फैले पूरे नेटवर्क का ब्योरा एसटीएफ को दिया। दावा किया जा रहा है कि संतोष किसी भी जिले में पैरवी कराने के लिये बड़ी आसानी से सचिवालय से फोन करवा लेता था। इस काम में अधिकारी-कर्मचारी सब उसकी तुरन्त मदद करते थे। अपने साथ साठगांठ में शामिल कई कर्मचारियों के नाम भी उसने बताये है। एसटीएफ ने इन सबसे पूछताछ करने की कवायद शुरू कर दी है। उधर, संतोष को हजरतगंज पुलिस ने जेल भेज दिया है। पशुधन फर्जीवाड़े की जांच मुख्यमंत्री के आदेश पर एसटीएफ ने की थी। जिसमें अब तक 11 गिरफ्तारियां हो चुकी है। गोण्डा निवासी संतोष मिश्र ने एसटीएफ को बताया कि सचिवालय के अंदर उसके सम्पर्क में कई लोग थे। एसटीएफ के अधिकारियों ने बताया कि संतोष का सचिवालय में काफी आना जाना था। कई बार वह शाम को पहुंचता था। फिर कई कर्मचारियों को वह होटलों में दावत देता था। यहीं वह छोटे कामों के लिये फोन करवाता था, फिर इसके बाद उन्हें रकम भी देता था। इन कर्मचारियों के नाम भी एसटीएफ को बताये गए हैं। संतोष ने एसटीएफ को यह भी बताया कि अलास्का इन्फ्रास्ट्रक्चर कम्पनी के एमडी हरिमोहन यादव ने उससे अपने मामले को मैनेज कराने के लिये सवा करोड़ रुपये दिये थे। पर काफी प्रयास के बाद भी उसका काम नहीं हो पाया।
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