बच्चों के लिए एकाग्रता बढ़ाने वाले योगासन

Yoga

स्कुल बंद है और बच्चे घर पर हैं। स्कूलों ने अब ऑनलाइन क्लासेज शुरू कर दी हैं। काफी दिनों से खाली बैठने के कारण इन दिनों बच्चों का पढ़ाई में मन न लगना स्वाभाविक है। वैसे भी बच्चों का मन चंचल होता है। इसलिए पढ़ाई के लिए जरूरी एकाग्रता की कमी के कारण बच्चे ठीक तरह से पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। अगर आप समझ रहे हैं कि एकाग्रता और बुद्धि क्षमता को बदला नहीं जा सकता है तो आप गलत हैं। योगासनों और प्राणायाम के द्वारा व्यक्ति की बुद्धि, याद करने की क्षमता और एकाग्रता तीनों को ही बढ़ाया जा सकता है। योग गुरू अमित सिंह से जानें बच्चों के लिए 3 बेहद आसान लेकिन प्रभावी योगासन, जिनके अभ्यास से बच्चों की ये तीनों क्षमताएं बढ़ती हैं।  
प्राणायाम के द्वारा पाएं एकाग्रता

एकाग्रता यानी कॉन्संट्रेशन बढ़ाने के लिए प्राणायाम बहुत उपयोगी है। इसके लिए सबसे पहले जमीन पर ज्ञान मुद्रा में बैठ जाएं, यानी पालथी मारकर कमर और पीठ को सीधा रखते हुए और हाथों को घुटनों पर रखकर। अब सामने रखी किसी एक वस्तु पर अपना ध्यान लगाएं और लंबी गहरी सांस लें। धीमी गति से सांस अंदर खींचें और फिर छोड़ दें। इस क्रिया को आप कम से कम 3 से 5 मिनट तक करें। अगर ध्यान भटकता है तो दोबारा वस्तु पर ध्यान लाएं और सांसों को भरते-छोड़ते हुए महसूस करें। इस योगासन के नियमित अभ्यास से बच्चों की एकाग्रता बढ़ने लगती है। इसके अलावा इस आसन के अभ्यास से याद करने की क्षमता भी बढ़ती है और चंचल मन शांत होता है।

अंगूठे की सहायता से ध्यान केंद्रित

इस आसन को करना भी बेहद आसान है। इसके लिए जमीन पर चटाई बिछाकर पहले की ही तरह ज्ञान मुद्रा में बैठ जाएं, पीठ को सीधा रखें। अब अपने दाएं हाथ को सामने की तरफ फैलाएं और मुी बंद करते हुए अंगूठे को बाहर निकालें। अब अपने अंगूठे के नाखून को 10 सेकेंड तक गौर से देखें और जब आपको लगे कि आपने अंगूठे पर ध्यान केंद्रित कर लिया है, तो धीरे-धीरे अंगूठे को अपनी आंखों के पास लाते जाएं। इस बीच आपको ध्यान रखना है कि अंगूठे के छोर से आपका ध्यान भटके नहीं। अंगूठा जब आंख के बहुत नजदीक आ जाएगा, तो आपको तस्वीर धुंधली दिखाई देने लगेगी। इस तरह बार-बार उंगली को आगे पीछे करते हुए ध्यान केंद्रित करें।

कॉसंट्रेशन के लिए वृक्षासन

इस आसन को करने के लिए जमीन पर बिल्कुल सीधा खड़े हो जाएं। अपने पैरों के बीच में थोड़ा गैप रखें। अब अपना एक पैर उठाएं और धीरे-धीरे इसे जांघों की तरफ ले आएं। पैर के तलवे को जांघ पर लगाते हुए दूसरे पैर से बैलेंस बनाएं। इसी पोजीशन में रहते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर की तरफ उठाएंगे और सीधा रखते हुए नमस्ते की पोजीशन में जोड़ लेंगे। इस बीच सामने देखते रहें और गहरी सांसें लेते रहें।

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