हर संभव एहतियात बरतना ही इस महामारी को हराएगा

देश में कोरोना से संक्रमितों का आंकड़ा भयावह गति से बढ़ रहा है. दिलासा की बात यह है कि संक्रमितों की हालत भी बड़ी तेजी से सुधर रही है. और हमारे यहां का रिकवरी रेट भी काफी उत्साहवर्धक है. मरने वालों का आंकड़ा भी दुनिया की अपेक्षा सबसे कम है. इसका मतलब यह कदापि नहीं है कि हम निङ्क्षश्चत हो जाएँ और लापरवाही करने लगे. आवश्यक है कि हम इस दिशा में शासन द्वारा जारी सभी निर्देशों का कड़ाई से पालन करें. कारण सावधानी और आवश्यक एहतियात का पालन ही इस महामारी से बचने का सबसे सटीक उपाय है. आज कल आर्थिक क्रियाकलाप पुन: शुरू है, जिसके चलते लोग काफी तादाद में घरों से बाहर निकल रहे है. इस दौरान ऐसे तमाम लोग नजर आ रहे है जो मास्क पहनने के और दूरी बरकरार रखने के नियमों का सख्ती से पालन नहीं कर रहे है. इसके लिए रोकने-टोकने पर पुलिसवालों से भी उलझ रहे हैं, यह किसी भी दृष्टि से सही नहीं है. जितने प्रतिबन्ध लगाये जा रहे है, या जो कुछ भी पहनने को कहा जा रहा है वह जनता के हित में है. इसका भान हर व्यक्ति को रखना चाहिए और अपने हित में उसका तंतोतंत अनुपालन करना चाहिए. अभी भी आंध्र, कर्नाटक के साथ महाराष्ट्र जहां देश में कोरोना प्रभावितों का आंकड़ा सबसे ऊपर है पूरे देश की चिंता का कारण बने हुए हैं. उसमे महाराष्ट्र को लेकर सर्वाधिक चिंता है, कारण यह देश की आर्थिक राजधानी है और देश भर के लोगों के रोजी-रोटी की आस है. जिस तरह यहां कोरोंना के बढ़ते प्रकोप से कई महीनों से आर्थिक क्रियाकलाप ठप है, उसका असर इस राज्य में ही नहीं बल्कि पूरे देश में दिख रहा है. इसलिए इस राज्य की सरकार और नागरिकों की विशेष ज़िम्मेदारी है कि वे और सख्ती से उन उपायों को अपनाएँ जो कोरोना का प्रसार रोकने में और उसे नियंत्रित करने में निर्णायक भूमिका निभा रहे है. जिससे मुंबई और महाराष्ट्र एक बार फिर गुलजार हो सके और अपने बाशिंदों काजनजीवन निहाल करने के साथ देश मे जो इसकी भूमिका है उसका निर्वहन कर सके.
कोरोना के साथ इस लड़ाई में चिकित्सक, सफाई कर्मी, नौकरशाह, पुलिसकर्मी सबकी भूमिका काफी सराहनीय रही है, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री मोदी स्वयं अपने हर संबोधन में करते रहे है. ऐसे कोरोना योद्धा जो अपनी जान की परवाह न कर निस्वार्थ भाव से इस महामारी के काल में जन सेवा में लगे है. ऐसा करते समय जिन्होंने अपनी कुर्बानी तक दे दी, उनकी जितनी भी प्रसंशा की जाय कम है. ये सब आदर और वंदना के पात्र है. परन्तु ऐसे चिकित्सकों, अस्पातालों, संचालकों और व्यापारियों की भी काफी संख्या है जिनमे इस आपदा काल में भी उक्त निस्वार्थ भावना का सर्वथा अभाव है. ऐसे तत्वों पर नजर रखने की और उनका पर्दाफाश करने की भी जरूरत है. कारण इन्होने आपदा को भी कमाई का अवसर बनाने का पातक किया है. लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर अनाप-शनाप बिल बनाया है, ऐसे काम सर्वथा निन्दंनीय और मानवता की उदाटा मान्यताओं के विपरीत है. ऐसे लोगों पर सरकार की भी नजर है, और जो अस्पताल ऐसा कुछ उल्टा-सीधा करते पाए जा रहे है, या जो व्यक्ति आवश्यक चीजों की कालाबाजारी या जमाखोरी करता हुआ पाया जा रहा है उस पर सख्त कारवाई भी हो रही है. हर व्यक्ति को इस दिशा में चौकस रहने की जरूरत है और यदि उसकी नजर में ऐसा कुछ आता है, तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित सक्षम अधिकारी या विभाग तक पहुंचायी जानी चाहिए.

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