कर्ज लेने वालों को दंडित नहीं किया जा सकता - सुप्रीम कोर्ट

आम आदमी को मिलेगी राहत!

नई दिल्ली
मोराटोरियम बढ़ाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आगे की सुनवाई गुरुवार को होगी। बुधवार हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बैंक पुनर्गठन के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन ऋण लेने वालों को दंडित नहीं किया जा सकता है। जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान लोन ईएमआई स्थगन योजना में ब्याज लगाकर ईमानदार ऋणकर्ताओं को दंडित नहीं कर सकते। याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश हुए वकील राजीब दत्ता ने कहा कि जनता इस समय संकट के दौर से गुजर रही है।
ये योजना सभी के लिए दोहरी मार की तरह है। इससे पहले केंद्र ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि लोन मोराटोरियम की सुविधा को 2 साल तक के लिए बढ़ाया जा सकता है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव दत्ता ने कोर्ट में कहा है कि लोग मुश्किल हालात से गुजर रहे हैं और यह स्कीम सभी के लिए दोहरी मार देने वाली है। उन्होंने तर्क दिया कि ब्याज लेना प्रथम दृष्टया में गलत है और बैंक इसे चार्ज नहीं कर सकते। सीआरईडीएआई की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आर्यमन सुंदरम ने कहा कि लंबे समय तक उधारकर्ताओं पर दंडात्मक ब्याज वसूलना अनुचित है, इससे एनपीए बढ़ सकता है।

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