हाईकोर्ट का परीक्षा के फैसले में हस्तक्षेप से इंकार

मुंबई
बंबई उच्च न्यायालय ने स्नातक पाठम्यक्रम के अंतिम वर्ष की परीक्षा आयोजित करने के मुंबई विश्वविद्यालय के फैसले में हस्तक्षेप से इंकार कर दिया। विश्वविद्यालय ने स्नातक कोर्स के अंतिम वर्ष की परीक्षाएं एक अक्टूबर से आयोजित करने का निर्णय लिया है। मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जीएस कुलकर्णी की पीठ ने परीक्षाओं पर रोक लगाने का अनुरोध करने वाली याचिका दायर करने वाले मुंबई विश्वविद्यालय के दो छात्रों को किसी भी तरह की राहत के लिए कुलपति से गुहार लगाने को कहा। उच्चतम न्यायालय की ओर से दिए गए आदेश के बाद मुंबई विश्वविद्यालय ने तीसरे वर्ष के अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं आयोजित करने की तारीखों के संबंध में परिपत्र जारी किया था। शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि अंतिम वर्ष के छात्रों को परीक्षा देने के बाद ही आगे बढ़ाया जा सकता है। मुंबई विश्वविद्यालय की परीक्षाएं एक से 17 अक्टूबर के बीच ऑनलाइन आयोजित की जाएंगी। विश्वविद्यालय की ओर से पेश वकील रुई रोड्रिग्स ने पीठ के समक्ष कहा कि परीक्षाएं ऑनलाइन आयोजित की जाएंगी और यह बहु-वैकल्पिक प्रश्न (एमसीक्यू) के प्रारूप में होगी।
हालांकि, याचिकाकर्ताओं के वकील शेरोन पटोले ने दलील दी कि विश्वविद्यालय ने परीक्षा की तारीखों की घोषणा जल्दबाजी में की थी। उन्होंने पीठ को सूचित किया कि एमसीक्यू प्रारूप नया है और इसे समझने के लिए छात्रों और शिक्षकों को थोड़ा प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
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