कृषि बिलों पर विपक्ष के प्रदर्शन के बीच स्मृति ईरानी ने पूछा- क्यों हो रहा विरोध?

नई दिल्ली
संसद से पारित कृषि संबंधी तीन बिलों को लेकर जहां एक तरफ हरियाणा-पंजाब समेत देश के कई राज्यों के किसान आंदोलन कर रहे हैं तो वहीं विपक्षी दलों ने इसका सदन के अंदर से लेकर बाहर तक पुरजोर विरोध किया है। इस बीच, कांग्रेस सांसद और राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने इस बिल को लेकर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से बुधवार को शाम को मुलाकात की।
इधर, विपक्ष के भारी विरोध के बाद केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी सवाल किया है कि आखिर कृषि संबंधी बिलों पर इतना हो-हल्ला क्यों मचा है? उन्होंने कहा, 'ये बिल किसानों को अपने उत्पाद को स्वतंत्र रूप से व्यापार करने की अनुमति देता है। किसानों की जमीन को सुरक्षित करने के साथ ही यह सुनिश्चित करता है कि व्यापारियों को अधिकतम तीन दिनों के अंदर किसानों को भुगतान करना होगा। फिर, क्यों विपक्ष इन बिलों का विरोध कर रहे हैं?'
स्मृति ईरानी ने कहा, कांग्रेस ने 10 वर्षों में स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू नहीं किया। मोदी सरकार ने रिपोर्ट को लागू किया और करीब ढाई गुणा ज्यादा न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया। किसान निधि योजना के अंतर्गत 10 करोड़ से ज्यादा किसानों के खातों में 90 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का ट्रांसफर किया गया है।
केन्द्रीय मंत्री ने आगे कहा, यह स्पष्ट है कि मोदी सरकार किसानों के कल्याण को लेकर संकल्पित है। हमें यह समझना होगा कि जब सरकार संसद में कुछ कहता है तो यह राष्ट्र की जनता के प्रति किया गया यह एक बड़ा वादा है।
इधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने कृषि विधेयकों और ऊपरी सदन के आठ सांसदों के निलंबन के मुद्दों पर बुधवार को शाम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की। विपक्ष की करीब 16 पार्टियों ने इन मुद्दों को लेकर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा है।
इससे पहले फैसला हुआ था कि कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर सदन में सदस्यों की संख्या के आधार पर पांच प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तेलंगाना राष्ट्र समिति और द्रमुक के पांच प्रतिनिधि राष्ट्रपति के साथ मुलाकात के लिए जाएंगे।

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