प्रदर्शन के नाम पर रास्ता रोकने का अधिकार किसी को नहीं : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रदर्शन के अधिकार और लोगों के सड़क के इस्तेमाल के मामले में संतुलन बनाना जरूरी है। प्रदर्शन और इस दौरान सड़क को ब्लॉक करने के मामले में संतुलन की अनिवार्यता है। प्रदर्शन के अधिकार के लिए कोई निश्चित नीति नहीं है। इस पर कोई भी रोक केस के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रदर्शन के अधिकार और सड़क जाम की स्थिति में संतुलन बनाना होगा। हम इस मुद्दे को देखेंगे। संसदीय लोकतंत्र में प्रदर्शन का अधिकार है। यह संसद में हो सकता है और सड़क पर हो सकता है लेकिन सड़क पर शांतिपूर्ण ही होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एसके कौल की अगुवाई वाली बेंच ने फैसला सुरक्षित रखते हुए टिप्पणी में कहा कि प्रदर्शन करने का अधिकार और लोगों के सड़क पर चलने के अधिकार में संतुलन बनाने की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर शाहीनबाग में होने वाले प्रदर्शनकारी को हटाने की मांग की गई थी और कहा गया था कि उन्हें सड़क से हटाया जाए या फिर कहीं और प्रदर्शन के लिए उन्हें जगह देकर वहां शिफ्ट किया जाए। सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल करने वाले ऐडवोकेट अमित साहनी ने कहा कि इस तरह से प्रदर्शन की इजाजत नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कल ही हरियाणा में चक्का जाम किया गया है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राइट टु प्रोटेस्ट और लोगों के रास्ते के इस्तेमाल को लेकर संतुलन की जरूरत है। लंबे समय तक सड़क को ब्लॉक किया गया था। और ऐसे में सड़क इस्तेमाल करने वालों के अधिकार का क्या हुआ? इस दौरान प्रदर्शनकारियों की ओर से दखल देने वाले महमूद पराचा ने कहा कि मामले में यूनिवर्सल नियम का पालन होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि प्रदर्शन करना मौलिक अधिकार है लेकिन वाजिब रोक भी है। 17 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि प्रदर्शन करना लोगों का मौलिक अधिकार है लेकिन पब्लिक रोड को ब्ल़ॉक करना चिंता की बात है और एक संतुलन की जरूरत है।

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