इस साल आतंकियों से मुकाबला करते 40 जवान हुए शहीद

indian army

श्रीनगर

कश्मीर में आतंकियों से मुकाबला करते हुए इस साल चालीस जवान शहीद हुए हैं। इनमे ऐसे कर्मचारी भी थे, जिनके पास हथियार तक नहीं थे। वे या तो सड़क पर रूटीन ड्यूटी पर थे, या फिर घरों में आए हुए थे। दो दिन पहले अनंतनाग में आतंकियों ने पुलिस के इंस्पेक्टर अशरफ को उस समय निशाना बनाया, जब वह नमाज अता करके वापस आ रहे थे। पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह का कहना है कि इस साल आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशनों में काफी सफलता मिली है, लेकिन हमने भी अपने चालीस जवानों को खो दिया है। उन्होंने कहा कि हमारे जवानों में आतंकियों से लड़ने का जज्बा कायम है। जानकारी के अनुसार बुधवार को पुलिस डे के मौके पर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में शहीदों को याद किया गया और सलामी दी गई। प्रदेश में कई जगहों पर कार्यक्रम हुए। इस दौरान पुलिस महानिदेशक ने बताया कि इस साल हमारे चालीस जवान शहीद हुए हैं। उनका कहना था कि पुलिस फोर्स ने अपने जवानों को खोया है और सभी परिवारों के साथ पूरा विभाग खड़ा है।

प्रदेश में करीब तीन दशक से जारी आतंकवाद में अब तक सैकड़ों जवान शहीद हो चुके हैं। हालांकि आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए प्रदेश में सेना और सीआरपीएफ भी है लेकिन पुलिस सड़कों पर तैनात होती है, जो सीधे तौर पर आतंकियों के निशाने पर रहती है। ऐसे में पुलिस को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। बाकी फोर्स के जवान ऑपरेशनों में शहीद होते हैं लेकिन पुलिस के जवान सड़क पर ड्यूटी करते हुए भी आतंकियों के निशाने पर आ जाते हैं। इस साल आतंकियों ने साल के शुरु में ही हमलों को तेज कर दिया था, जिसमें अधिकतर सीआरपीएफ तथा पुलिस के जवानों को निशाना बनाया गया था। इसी माह कश्मीर में आतंकियों ने भाजपा नेता के घर पर हमला किया, जिसमें पुलिस का जवान शहीद हुआ। इस साल 180 से अधिक आतंकियों को मार गिराया गया।


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