9 राज्यों में हिंदुओं को मिले अल्पसंख्यक का दर्जा

नई दिल्ली 

सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर गुहार लगाई गई है कि नेशनल कमिशन फॉर माइनॉरिटी एक्ट के उस प्रावधान को खत्म किया जाए जिसके तहत देश में अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाता है। साथ ही गुहार लगाई गई है कि अगर कानून कायम रखा जाता है तो जिन 9 राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हैं, उन्हें राज् यवार स्तर पर अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाए ताकि उन्हें अल्पसंख्यक का लाभ मिले। 

सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर नेशनल कमिशन फॉर माइनॉरिटी एक्ट 1992 के प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिकाएं जो तमाम राज् यों के हाई कोर्ट में पेंडिंग हैं उन्हें सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की गुहार लगाई गई है। 

बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय की ओर से दाखिल अर्जी में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने माइनॉरिटी एक्ट की धारा-2 (सी) के तहत मुस्लिम, क्रिश्चियन, सिख, बौद्ध और जैन को अल्पसंख्यक घोषित किया है लेकिन उसने यहूदी बहाई को अल्पसंख्यक घोषित नहीं किया गया। साथ ही कहा गया है कि देश के 9 राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हैं लेकिन उन्हें अल्पसंख्यक का लाभ नहीं मिल रहा है। याचिका में कहा गया कि लद्दाख, मिजोरम, लक्ष्यद्वीप, कश्मीर, नागालैंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, पंजाब और मणिपुर में हिंदू की जनसंख्या अल्पसंख्यक तौर पर है। याची ने कहा कि इन राज्यों में अल्पसंख्यक होने के कारण हिंदुओं को अल्पसंख्यक का लाभ मिलना चाहिए, लेकिन उनका लाभ उन राज्यों के बहुसंख्यक को दिया जा रहा है। 

अल्पसंख्यक दर्जा देने वाला कानून खत्म हो 

याचिका में कहा गया है कि संविधान में अल्पसंख्यक शब्द दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के 11 जजों की बेंच ने 2002 इसकी व्याख्या करते हुए कहा था कि भाषाई और धर्म के आधार पर जो अल्पसंख्यक माना जाएगा। याचिकाकर्ता ने कहा कि राज्यों की मान्यता भाषाई आधार पर हुई है ऐसे में अल्पसंख्यक का दर्जा राज्यवार होना चाहिए न कि देश के लेवल पर हो सकता है। ऐसे में भाषाई और धर्म के आधार पर स्टेटवाइज ही अल्पसंख्यक का दर्जा होना चाहिए और राज्यवार ही इस पर विचार होना चाहिए। 

Post a comment

[blogger]

MKRdezign

Contact form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget