वरिष्ठ नागरिकों के लिए मुंबई असुरक्षित

मुंबई
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक मुंबई में बुजुर्गों पर होने वाले अपराध लगातार बढ़ते जा रहे हैं। मुंबई बुजुर्गों के लिए सुरक्षित नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन सालों में मुंबई में सबसे अधिक बुजुर्ग आपराधिक वारदात का शिकार हुए हैं। यहां रोजाना औसतन चार बुजुर्गों के साथ ठगी, मारपीट, डकैती जैसी वारदातें हो रहीं हैं।
साल 2019 में मुंबई में 1231 बुजुर्ग आपराधिक वारदातों का शिकार बने। मुंबई के बाद दिल्ली, अहमदाबाद बुजुर्गों के लिए सबसे असुरक्षित शहर हैं। मुंबई में साल 2018 में 1043 बुजुर्ग आपराधिक वारदातों का शिकार हुए थे, लेकिन यह आंकड़ा पिछले साल बढ़कर 1231 तक पहुंच गया। यानी बुजुर्गों के खिलाफ हो रहे अपराध कम होने के बजाय 15 फीसदी बढ़ गए। दिल्ली में 1076 बुजुर्ग अपराधियों के शिकार बने, जबकि अहमदाबाद में 794, चेन्नई में 552 और सूरत में 232 बुजुर्गों ने आपराधिक वारदातों का सामना किया। आंकड़े बताते हैं कि सभी शहरों में बुजुर्गों के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं। बुजुर्ग सबसे ज्यादा ठगी और धोखाधड़ी के शिकार हो रहे हैं। मुंबई में 488 बुजुर्गों को ठगों ने निशाना बनाया है। ऑनलाइन ठग भी बुजुर्गों को ज्यादा निशाना बना रहे हैं। इसके अलावा मुंबई में बड़ी संख्या में ऐसे बुजुर्गों ने अपराध का सामना किया है, जो परिवार और बच्चों से दूर रहते हैं। 20 लाख से ज्यादा आबादी वाले देश के 19 बड़े शहरों में साल 2018 में 4230 बुजुर्ग अपराधियों का शिकार बने थे, जबकि साल 2019 में यह आंकड़ा बढ़कर 4897 हो गया।
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