तुर्की छोड़ सभी देशों ने पाकिस्तान से मुंह फेरा

turkey flag

पेरिस 

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को एक बार फिर से ग्रे लिस्ट में रखकर जहां जोरदार झटका दिया है वहीं 39 देशों में 38 ने भी उससे मुंह मोड़ लिया। केवल तुर्की ही एक ऐसा देश रहा जिसने पाक को ग्रे लिस्ट से बाहर निकाले जाने की वकालत की। 

हालांकि आईसीआरजी की बैठक में तुर्की, चीन और सऊदी अरब ने तकनीकी आधार पर पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर निकालने की वकालत की, लेकिन एफएटीएफ की प्लेनरी बैठक में केवल तुर्की ने ही पाकिस्तान का समर्थ नकिया। इनम े ंस े लगभग सभी देशों ने बैठक में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान की निंदा की। पाकिस्तान और तुर्की के बीच दोस्ती के पीछे असली वजह इस्लाम का विस्तारवाद है, जो इस्लामिक दुनिया में सऊदी अरब से नेतृत्वकारी स्थान लेना चाहता है। तुर्की प्रधानमंत्री रेसप तैयप एर्दोगन के नेतृत्व में तुर्क साम्राज्य की विरासत को फिर से जीवित करने की कोशिश कर रहा है। मध्य-पूर्व पर नजर रखने वाले एक विशेषज्ञ ने कहा कि इराक, सीरिया से लेकर लीबिया और अजरबैजान में तुर्की समसयाएं पैदा कर रहा है। तुर्की पाकिस्तान के साथ मिलकर इस्लामी विद्रोहियों को संगठित करके दुनिया के विभिन्न हिस्सों में हिंसा, अस्थिरता और अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहा है। एफएटीएफ ने पाक को जून 2018 में ग्रे सूची में डाला था और इस्लामाबाद को धन शोधन और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने की 27 बिंदुओं की कार्य योजना को वर्ष 2019 के अंत तक लागू करने को कहा था। कोविड महामारी की वजह से इस मियाद में वृद्धि कर दी गई। भारत ने पाकिस्तान की सच्चाई से दुनिया के सामने पर्दा उठाया और बताया है कि पाक ने 27 में से सिर्फ 21 बिंदुओं पर काम किया है और अभी भी वहां आतंकियों को पनाह दी जा रही है। भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र की सूची में शामिल जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया और दाउद इब्राहिम जैसे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहा है। 


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