कमलनाथ और दिग्विजय सिंह सबसे बड़े गद्दार : सिंधिया

 


भोपाल 

कांग्रेस से भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने पूर्व के राजनीतिक साथियों पर हमला करने का कोई मौका नहीं चूक रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को सिंधिया ने अब राज्य में 'सबसे बड़ा गद्दार' करार दिया है। सिंधिया ने सोमवार को कहा कि उन्होंने भ्रष्ट सरकार चलाकर मतदाताओं के भरोसे के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने कहा कि मुझे कांग्रेस तब छोड़नी पड़ी जब हर संभव प्रयास करने के बाद भी लोगों की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसके साथ ही सिंधिया ने भरोसा जताया कि राज्य में होने वाले उपचुनाव में भाजपा अगर सभी 28 सीटें नहीं तो भी अधिकतम सीटों पर जीत दर्ज करेगी। एक साक्षात्कार में सिंधिया ने कहा कि जिन 28 सीटों पर चुनाव होना है उनमें 27 कांग्रेस की थीं, इसलिए भाजपा के पास हासिल करने के लिए सबकुछ है और कांग्रेस के पास खोने के सबकुछ दांव पर लगा है। 

'राज्य की जनता को कांग्रेस से कोई उम्मीद नहीं' 

सिंधिया ने कहा, 'कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए सोचने के लिए भी 28 में से 28 सीटों पर जीत हासिल करनी होगी और उन्होंने हाल ही में एक और विधायक (राहुल लोधी) खो दिया है, जो भाजपा में शामिल हो गए हैं। यह पूरी तरह से साफ है कि लोगों को कांग्रेस पार्टी से कोई उम्मीद नहीं है। मुझे नहीं लगता कि किसी अन्य राज्य में इतनी बड़ी संख्या में आपने विधायकों को, करीब 30 फीसदी, पार्टी छोड़ते हुए देखा गया होगा। इससे पता चलता है कि कांग्रेस पार्टी में लोगों का भरोसा नहीं है'। कां ग्र ेसद्वारा चुनाव प्रचार में पार्टी नेताओं द्वारा उन्हें गद्दार कहे जाने के सवाल पर सिंधिया ने कहा कि यह ऐसा शब्द है जिसका मैं राजनीति में सामान्य तौर पर इस्तेमाल नहीं करता हूं। सिंधिया ने कहा कि राजनीति में एक निश्चित स्तर होता है और उसका पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'अगर वे इस शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं तो मध्यप्रदेश में सबसे बड़े गद्दार कमलनाथ और दिग्विजय सिंह हैं। 

 9 जिलों में फिर शुरू होंगी रैलियां 

मध्य प्रदेश में उपचुनाव के दौरान 9 जिलों में दोबारा रैलियां हो सकेंगी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने पिछले दिनों राज्य में फिजिकल रैलियों पर रोक लगा दी थी और वर्चुअल रैली कराने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसी आदेश पर सोमवार को स्टे लगा दिया और कोरोना के मद्देनजर जरूरी कदम उठाने का फैसला चुनाव आयोग पर छोड़ दिया। 

जस्टिस एएम खानविलकर की बेंच ने कहा, 'अगर राजनीतिक दलों ने सही तरह से काम किया होता और प्रोटोकॉल माना होता तो ऐसे हालात बनते ही नहीं। आपको खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि इस हालात के लिए जिम्मेदार कौन है? अपना काम इस तरह कीजिए, जो सभी के हित में हो। अगर आपने ठीक से काम किया होता तो हाईकोर्ट को दखल देने की जरूरत ही नहीं पड़ती'। सुप्रीम कोर्ट 6 हफ्ते बाद इस मामले की सुनवाई करेगा। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने 21 अक्टूबर को ग्वालियर, गुना, मुरैना, भिंड, अशोक नगर, दतिया, शिवपुरी, श्योपुर और विदिशा के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट से कहा था कि अगर वर्चुअल इलेक्शन कैम्पेन की गुंजाइश है तो किसी भी पार्टी को फिजिकल रैली की इजाजत न दें। 


Post a comment

[blogger]

MKRdezign

Contact form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget