बातचीत के बीच ड्रैगन की चालबाजी

एलएसी के पास नए ढांचे बना रहा है चीन सैनिकों का बदल रहा ठिकाना

China Army

नई दिल्ली

एक तरफ चीन और भारत में लद्दाख में तनातनी वाले स्थानों से सैनिकों की वापसी को लेकर सैन्य स्तर की बातचीत चल रही है तो दूसरी तरफ चीन अक्साई चिन और शिनजियांग में नए ढांचे बनाकर सैनिकों का ठिकाना बदलने में जुटा है। इससे जाहिर है कि ड्रैगन कम से कम इस सर्दी तो 1597 किलोमीटर लंबे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल से पीछे हटने के मूड में नहीं है। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने 3 लाख स्क्वायर फीट (करीब 4 फुटबॉल मैदान के बराबर जगह) में विशाल ढांचों का निर्माण नोटिस किया है। यह गोगरा हॉट ङ्क्षस्प्रग्स एरिया के पास अक्साई चिन में एलएसी से 10 किलोमीटर की दूरी पर है। चीन वाहनों और उपकरणों को एलएसी से 82 किलोमीटर दूर शिनजियांग में छिपाकर रख रहा है।

भारतीय पक्ष ने अक्साई चिन में 92 किलोमीटर भीतर पीएलए सैनिकों और सैन्य सामग्रियों का स्थान परिवर्तन भी देखा है। लद्दाख के डेमचोक के पास तिब्बत क्षेत्र में बड़ी संख्या में पीएलए के वाहनों की आवाजाही दिख रही है। यह भी स्पष्ट है कि पीएलए इंटेलिजेंस गलवान क्षेत्र और कोंगका ला इलाके पर अक्साई चिन के एलएसी से 8 से 20 किलोमीटर दूर पोजिशन से नजर बनाए हुए है।

पीएलए भारत-चीन सीमा से 166 किलोमीटर दूर शिनजियांग में होटान और कानशीवार के बीच सड़क निर्माण में जुटा है ताकि सैनिकों के लिए अक्साई चिन पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध करा सके। चीन एलएसी स्टैंडऑफ के लिए होस्टन एयर बेस पर वाई-20 विमानों से सप्लाई पहुंचा रहा है, जोकि एलएसी से 320 किलो मीटर दूर है।

पीएलए की एक्टिविटी लद्दाख तक सीमित नहीं है। इस मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश में एलएसी से करीब 60 किलो मीटर की दूरी पर चीन ने काउंटर स्पेस जैमर्स लगाए हैं ताकि भारतीय सैटेलाइट पीएलए की एक्टिविटी को ना पकड़ सकें। यह समझा जाता है कि पीएलए ने अरुणाचल प्रदेश के पास नियंगची के अंदरुनी इलाकों में रूसी एस-400 मिसाइल सिस्टम को लगाया है ताकि किसी आसमानी खतरे से निपटा जा सके।

पीएलए के रुख का शुद्ध मूल्यांकन यह है कि चीन गोलमुद में स्थापित किए जा रहे ठिकानों और स्टोरेज डिपो के साथ अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, जो कि ल्हासा से ट्रेनों और किन्हाई प्रांत में नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाने वाले दोहरे हवाई अड्डों से जुड़ा हुआ है। एक तरफ बीजिंग का कहना है कि वह 10 सितंबर को मॉस्को में विदेशी मंत्रियों एस जयशंकर और वांग यी के बीच बनी सहमति के अनुसार लद्दाख एलएसी से तनाव खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन पीएलए इस पर पालन करने के लिए कोई संकेत या इच्छा नहीं दिखा रहा है। चीन की पीछे ना हटने की इच्छा को देखते हुए भारतीय सेना अलर्ट पर है और सैनिक सिख रेजिमेंट के ले. जनरल पीजीके मेनन की अगुआई में एक्सआईवी कॉर्प्स कमांड के साथ अपनी सीमा में पूरी सक्रियता से पेट्रोलिंग कर रहे हैं।


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