गर्दन और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं


दुघर्टनाओं और गलत जीवनशैली के कारण देश में गर्दन एवं रीढ़ की हड्डी(स्पाइनल कॉर्ड) के क्षतिग्रस्त होने की समस्याएं बढ़ रही हैं। देश में करीब 15 लाख लोगों को गर्दन अथवा स्पाइनल कॉर्ड में चोट लगने के कारण विकलांगता का जीवन व्यतीत करना पड़ रहा है। अनुमानों के अनुसार देश में हर साल स्पाइनल कॉर्ड के चोटिल होने के 20 हजार से अधिक मामले आते हैं। 

ऊंचाई से गिरने, खेल-कूद और मार-पीट जैसे कई कारणों से गर्दन क्षतिग्रस्त हो सकती है और कई बार इसकी वजह से मौत भी हो सकती है। इसके अलावा गलत तरीके से व्यायाम करने और सोने-उठने-बैठने के गलत तौर-तरीकों से भी गर्दन दर्द की समस्या हो सकती है। 

गर्दन की गतिशीलता की मदद से ही हम आगे-पीछे देखते हैं, कप्यूटर आदि पर काम करते हैं या किसी से बात करते हैं। गर्दन में हमारे शरीर का बहुत ही नाजुक अंग है, जिसे स्पाइनल कॉर्ड कहा जाता है, जो कई कारणों से चोटिल हो सकता है। अगर गर्दन में चोट बहुत हल्की हो तो आराम करने या फीजियोथिरेपी से राहत मिल जाती है लेकिन कई लोगों के लिए गर्दन में चोट विकलांगता का भी कारण बन जाता है। ऐसे में जरूरी है कि गर्दन में चोट या गर्दन की किसी भी समस्या की अनदेखी नहीं करें। अगर आराम करने या दवाइयों के सेवन से भी गर्दन दर्द बढ़ता जाए या गर्दन दर्द बांहों और पैरों तक फैल जाए अथवा सिर दर्द, कमजोरी, हाथों और पैरों में सुन्नपन और झुनझुनी आए तो तुरंत न्यूरो एवं स्पाइन विशेषज्ञ से जांच और इलाज कराएं। 

सवाईकल कॉर्ड में चोट लगने से गर्दन में दर्द की समस्या बहुत ही आम है और इससे काफी लोग ग्रस्त रहते हैं। लेकिन अगर क्वाड्रिप्लेजिया पैरालाइसिस होने पर मरीज को ताउम्र विकलांग जीवन व्यतीत करना पड़ सकता है। उसे बिस्तर पर ही रहने को मजबूर होना पड़ सकता है, उसे बेड सोर यानी बिस्तर पर लंबे समय तक सोने से होने वाले घाव सकते हैं और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है और वह रोजमर्रा के कामकाज एवं दिनचर्या के लिए अपने परिजनों पर ही पूरी तरह से निर्भर हो जाता है। 

स्पाइनल कॉर्ड में चोट लगने से उसके नीचे का हिस्सा सुन्न हो सकता है, मल-मूत्र त्यागने में दिक्कत हो सकती है और कई बार सांस लेने में भी तकलीफ हो सकती है। इसलिए गर्दन एवं सवाईकल स्पाइन की सुरक्षा करना बहुत जरूरी है और इसमें चोट लगने या कोई दिक्कत होने पर उसकी अनदेखी नहीं करें। गर्दन को हमें हर तरह की चोट से बचा कर रखना जरूरी है और चोट लगने पर तत्काल इलाज करना जरूरी है। ऊंचाई से गिरने पर कई बार मौके पर ही मौत हो जाती है। ऐसे मामलों में ज्यादातर सवाईकल स्पाइन में इंज्युरी ही होती है। दुर्घटना के शिकार या उंचाई से गिरने वाले घायल व्यक्ति का तत्काल आपरेशन होना जरूरी है जिसमें उनके गर्दन की हड्डी को सीधा किया जाता है प्लेट लगाकर उसे एलाइमेंट में रखा जाता है। 


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