चल-चल ओ काका चुनाव आ गइल, अच्छा नेता चुने के अधिकार आ गइल.

पटना

बिहार विधानसभा चुनाव में प्रथम चरण के मतदान को अब कुछ ही दिन शेष बचे हैं। ऐसे में चुनाव प्रचार के विविध रंग मतदाताओं को देखने को मिल रहे हैं। कहीं प्रत्याशी खुद दरवाजे-दरवाजे जाकर मतदाताओं को गोलबंद करने में जुटे हैं तो कहीं कलाकारों की टोली लोकगीतों के जरिये वोट की महत्ता बताने में जुटी है। शहर के चौक-चौराहों पर गायकों की मंडली ढोल, हारमोनियम और झाल के साथ एकत्र होकर लोगों को गीतों के जरिए आनंदित करने के साथ ही वोट के जरिए सही प्रत्याशी का चुनाव करने के लिए जागरूक करने में लगी है। सरगम आर्ट्स के कलाकारों की टोली सामाजिक मकसद से लोगों को मतदान का महत्व बता रही है।

गीतों का अलग-अलग महत्व -

ढोल, हारमोनियम लिए कलाकारों की मंडली सचिवालय के पास अपने गीतों से मतदान का महत्व बताने में लगी है। कलाकारों ने 'चल-चल ओ काका चुनाव आ गइल, अच्छा नेता चुने के अधिकार आ गइल, काम जे ना कइले बा वोट नाहीं पाई, अबकी चुनाव में तू करिह विदाई, पांच साल के लेवे के हिसाब आ गईल.. और 'नाम वाला नाहीं काम वाला चाही ..' जैसे गीतों के जरिये मतदाताओं का ध्यान आकर्षित करने में लगे हैं। गायक कुंदन तिवारी की आवाज में चुनावी गीत को सुनकर मतदाता भी झूम रहे हैं। कलाकार मंडली ने 'नेता हो बिहार के दुखी आ लाचार के सुने के गरीब के और सुने लाचार के..' वही गायिका रत्ना गांगुली ने 'मोर भइया हो सोच समझ के करिह मतदान, जात-पात से उपर उठकर करिह तू विचार, बढिय़ा नेता अइहे उहे करिहे जन कल्याण..' जैसे गीतों के जरिये मतदाताओं से काम करने वाले प्रत्याशी को वोट देने की अपील की। गायक कुंदन तिवारी ने बताया कि पिछले विधानसभा चुनाव में भी लोगों को उनकी गायन मंडली ने जागरूक किया था। उन्होंने बताया कि चुनाव को लेकर गीत और संगीत, मंडली की ओर से तैयार किया जाता है। इसे लोग खूब पसंद करते हैं। हम जैसे कलाकारों की कोई सुनने वाला नहीं। कोरोना काल में कलाकारों के रोजी-रोटी पर भी आफत आ गई थी। ऐसे में कलाकार अपनी अभिव्यक्ति को गीतों के जरिए बयां करता रहा ह


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