चीन को जैसे को तैसा जवाब सही

चीन जैसा पड़ोसी 'जैसे को तैसा' जबाब मिलने पर ही नियंत्रित रह सकते हैं और हम वही कर रहे है. हमने उसकी नाराजगी न लेने के लिए उसके जिन दुश्मनों से अब तक दूरी बना रखी थी, अब उनसे सबंध प्रगाढ़ करने की और अग्रसर हो रहे हैं। ताइवान लम्बे समय से ट्रेड डील का इच्छुक था. हमने ही चीन को सद्बुद्धि आयेगी इस आस में उसे यथोचित तवज्जो नहीं दी थी. अब जबकि चीन के साथ पंगा जग जाहिर है और हमने ठान लिया है कि उसे अब सबक देकर ही रहेंगे, उसकी बार-बार घुसपैठ की प्रवृत्ति पर पूर्ण विराम लगाकर ही रहेंगे तो अब हमने ताइवान से भी रिश्ता प्रगाढ़ करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है और तिब्बत के मुद्दे पर भी हमने अपना कूटनीतिक रुख चीन के खिलाफ और धारदार कर दिया है. दुश्मन का दुश्मन हमारा दोस्त यह कूटनीतिक सिद्धांत काफी पुराना और प्रचलित सिद्धांत रहा है. चीन जैसे शत्रु के खिलाफ राजनय के हर हथियारों का इस्तेमाल ही वह शक्ति है. जो कारगर हो रही है और उसके आगे चीन बेबस है. उसे हमारी एक एक इंच जमीन से वापस जाना होगा, इसके सिवाय उसके पास कोई चारा नहीं है. वह जिस तरीके से वापस जाएगा उसे वैसे ही भेजा जायेगा. यह हमारी सरकार शुरू से ही स्पष्ट कर चुकी है, यही नहीं हमने अपने घर के अन्दर भी उसके द्वारा पाले गए उसके भेदियों और जासूसों को चुन चुन का बाहर निकालना शुरू कर दिया है. मतलब साफ़ है कि अब चीन को जिस तरह की भाषा वह समझता है, उसी भाषा में उसे समझाने का तरीका सीखने के लिए चीन की कुनीति ने हमें बाध्य किया है. जिस की ऊष्मा वह सामरिक, आर्थिक और कूटनीतिक हर मोर्चे पर महसूस कर रहा है और आगे भी करेगा और तब तक करेगा जब तक उसकी नीति और नियत सही नहीं हो जाती और हमारे पूरे इलाके से वह दूर नहीं हो जाता. कूटनीति के चार महत्वपूर्ण आंग है, जिन्हें साम, दाम, दंड और भेद के नाम से जाना जाता है. आज का भारत बड़ी ही सिद्धहस्त तरीके से इन सबका इस्तेमाल चीन के खिलाफ कर रहा है, जिसको विश्व का भी समर्थन है. कारण हम सही है और सच्चाई पर है. यह बात सारा जग जानता है और जिसे दुनिया का दादा बनने का महत्वाकांक्षा नहीं समझ सकता, लेकिन जो उसकी अंतर्राष्ट्रीय कुख्याति है, जो उसकी भूपिपासा के चलते बनी है और जों रही सही कसर थी, वह उसके द्वारा कोरोना के निर्यात ने पूरी कर दी है.उसके लिए बचने का बहुत कम अवसर छोड़ती है. इसलिए अभी भी सुधरे तो ठीक नहीं, तो इस बार उसे हमेशा हमेशा के लिए सबक मिलना तय है. पुरानी कहावत है कि 'अति सर्वत्र वर्जयेत्' चीन ने अति कर दी है. अपना उल्लू सीधा करने के लिए उसने ऐसे देशों का हर तरह से साथ दिया है, जिनकी कारस्तानियां पूरी दुनिया को खतरे में डाल सकती है और डाल रही है. पाक के आतंकी कारोबार से और उसके कहर से पूरी दुनिया परिचित है. उत्तर कोरिया का तनाशाह क्या कर रहा है, इससे भी दुनिया वाकिब है. चीन किस तरह छोटे देशों को कर्ज देकर उनका शोषण करता है, वहा भी विश्व विदित है और अब कोरोना जैसी महामारी का निर्यात कर विश्व की मानवता के लिए जो विपात्ति खडी की है. वह दुनिया भोग रही है. इसके बाद भी आप दादागीरी करोगे तो आपका जहन्नुम जाना तय है चीन भी उसी राह पर है.

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