पाकिस्तान की हिमाकत को रोकना होगा

जिस ऱफ्तार से पाकिस्तान सीमा पर सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है और अकारण गोलीबारी कर रहा है और अभी भी उसका घाटी में प्रत्यक्ष या परोक्ष आतंकवाद को समर्थन जारी है . लगता है कि उसे निकट भविष्य में निर्णायक सबक सिखाना ही होगा. रोज-रोज घाटी में आतंकी मारे जा रहे है, वह मोदी युग में दो-दो सर्जिकल स्ट्राइक झेल चुका है. अनगिनत बार उसकी हिमाकतों के प्रतिउत्तर में उसकी तमाम चौकियां तबाह की जा चुकी है, उसके जवान और भाड़े के टट्टू काफी तादाद में मारे गये है. इसके बाद भी उसका घाटी में या हमसे लगी घाटी से लेकर पंजाब तक की सीमा पर उसके द्वारा घुसपैठ का प्रयास जारी ही रहा है. जिसमे उसे अपने आका चीन का भी समर्थन और सहयोग मिल रहा है. यह अलग बात है कि हमारी सतर्क और सक्षम सेना उसके हर मंसूबे को नाकाम कर रही है और घुसपैठ करने का प्रयास करने वालों को चुन-चुन कर जहन्नुम रसीद कर रही है. यही नहीं चीन और टर्की के साथ मिलकर वह लगातार हमारे मुद्दों में टांग अड़ा रहा है और उनका अंतर्राष्ट्रीयकरण करने पर लगा रहता है. हम इन सबका कूटनीतिक स्तर पर और सुरक्षाबलों द्वारा सामरिक स्तर पर सख्त, प्रभावी और करारा प्रतिकार कर रहे है. जब यह सब चलता है तो इसमें हमारे जवान भी शहीद होते है, यही नहीं पाक द्वारा मृत पड़े खालिस्तानी आन्दोलन को भी जीवित करने का प्रयास सतत जारी है. इसमें कुछ काम तो वह हमसे सतत द्वेष के चलते करता है और कुछ चीन के उकसावे पर करता है. कारण चीन ने अपनी कब्जावादी और विस्तारवादी कुनीति के तहत हमारी पीठ पर दोस्त बनकर छुरा भोंकने की जो हिमाकत की थी वह भारतीय सेना के पराक्रम और प्रधामंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व के सामने पानी मांग रही है. अब उसकी समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या करें? आगे बढ़ नहीं सकता और पीछे जाय तो जग हंसाई होती है. तो उसने अब बौखलाहट में नेपाल और पाकिस्तान का इस्तेमाल हमारे खिलाफ करना शुरू किया है. लेकिन एक मच्छर शेर का क्या बिगाड़ सकता है? यह सब कोई जानता है, तो ये दोनों मच्छर चीन जैसे गीदड़ के बहकावे में आकर और उसके चरणों में अपनी सम्प्रभुता और देश का स्वाभिमान गिरवी रख कर, और उसकी कठपुतली बनकर हमसे छेड़छाड़ की कोशिश कर रहे है. जबकि चीन इनके साथ अभी वही कर रहा है जो वह अपने हर दोस्त के साथ करता है. पहले गले मिलो और फिर उनकी जमीन पर कब्जा करो. पाक तो चीन की बीन पर दशकों से नाच रहा है, अब नेपाल भी उसकी गोल का नया सदस्य बना रहा है. इन दोनों के निजाम इतने नादान है चीन प्रेम में इतना लीन है कि अपनी जनता की भी आवाज को नहीं सुन रहे है, जो चीन के विरोध में मुखर हो रही है. वैसे भी हमारी सरकार ने तय कर लिया है कि अब चीन और पाक को किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी. दोनों के साथ एक के बदले चार मारेंगे की नीति पर काम हो रहा है. चीन इसे समझ रहा है इसलिए, बार-बार बात करने की कोशिश कर रहा है और बात हो रही है. लेकिन पाकिस्तान एक नंगे-भूखे की तरह हरकत कर रहा है, और बार-बार सीज-फायर का उल्लंघन कर रहा है. मार खाकर भी जो न सुधरे उसकी हिमाकत को रोकने के लिए अब और सख्त कदमों पर विचार करने का समय आ गया है. क्योंकि बिना कड़े सबक से यह देश दुनिया में आतंक का मक्का और असफल देश के रूप में पहचान बना चुका पाक नहीं सुधरने वाला. आज-कल उसका नया शिगूफा गिलगित-बल्टिस्तान को राज्य का दर्जा देने को लेकर शुरू है. जबकि पाकिस्तान अच्छी तरह जानता है कि वह हमारा है, और हम उसे लेकर रहेंगे. लगता है अब उसे वापस लेना ही एक मात्र उपाय उपाय बचा है, जिससे पाक को कुछ सीख आये, कारण कड़ी कारवाई ही उसकी हिमाकत को रोक सकती है और वह करना ही होगा.

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