गणेशोत्सव जैसी ही सावधानी अनिवार्य

नवरात्रि आने में बस अब गिने चुने दिनों का अंतराल है उसके बाद दीपावली मनाई जाएगी, दशहरा और दीपावली दोनों हमारे देश के प्रमुख त्यौहार हैं। स्वाभाविक है कि दोनों उत्सव बड़े धूमधाम से मनाने की हमारी परंपरा है, वैसे तो ये त्यौहार पूरे देश में बड़े धूमधाम से मनाये जाते हैं पर गुजरात और महाराष्ट्र में इन त्योहारों को लेकर एक अलग ही उत्साह और आनन्द का माहौल नजर आता है, लेकिन इस बार हर त्यौहार पर कोरोना की काली छाया है। हमारा देश ही नहीं पूरी दुनिया इस महामारी से लड़ रही है। दुनिया में एक बड़ी आबादी इसका शिकार है और काफी तादाद में लोगों की जान गयी है। अपने देश में भी मरने वालों का आंकड़ा लाख के पार जा चुका है। यह राहत की बात है कि हमारे यहां बीमारी से ठीक होने वालों का आंकड़ा भी लगभग 86 प्रतिशत पहुंच गया है और मृत्यु दर भी दुनिया में सबसे कम है, संकेत सकारात्मक है लेकिन इन संकेतों के चलते हम महामारी को लेकर निर्भीक और निङ्क्षश्चत हो जाएं ऐसी स्थिति कदापि नहीं है, इसलिए जिस तरह हमने कोरोना काल में गणेशोत्सव से लेकर अन्य त्यौहार मनाये हैं उसी तरह आगे भी त्यौहार मनाना है। हम जी भर कर आदि शक्ति जगदम्बा की, भगवान राम की, माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करें, व्रत उपवास रखें। साथ ही करोना से बचने के लिए जो सावधानियां बरतने की जरूरत है उनका अच्छे से पालन करें, उसमें कोई लापरवाही ना बरतें। लम्बे समय बाद बीमारी अपने पंख सिकोड़ती नजर आ रही है लेकिन हमारी छोटी से छोटी लापरवाही भी हमे इसका शिकार बना सकती है और जो कुछ सकारात्मक संकेत आ रहे हैं उसे प्रभावित कर सकती है। लॉकडाउन के शुरुआत से लेकर अब तक कुछेक अपवादों को छोड़ दें तो देश की आवाम ने काबिलेतारीफ संयम का परिचय दिया है और एक अनुशासित नागरिक के रूप में व्यवहार किया है। जिसकी आज दुनिया सराहना कर रही है। इस दौरान भी देश ने सारे त्यौहार मनाये हैं और पूरी सावधानी के साथ। अब वैसी ही सावधानी आगामी त्योहारों पर भी बरतनी है जैसे-भीड़ ना लगायें, लोगों से दूरी बनाकर रखें, मास्क पहने और आतिशबाजी से बचें, ऐसा करके भी हम त्यौहार का आनन्द भी उठा सकते हैं और बीमारी से भी बचे रह सकते हैं, जो कोरोना को हराने की इस जंग में निर्णायक भूमिका अदा कर सकता है तो आइये संकल्प लें इस तरह त्यौहार मनाने का की त्यौहार भी मने और देश कोरोना से भी मुक्त हो।

इसके पहले हमने बड़ी मस्ती और श्रद्धा के माहौल में त्यौहार मनाए हैं। इस बार कोरोना से लड़ते हुए सावधानी से मनाएं इसी में सबका भला है। अभी कुछ लोग सूरमा बनने के चक्कर में और इस ग़लतफहमी में की उन्हें कुछ नहीं होगा, महामारी से बचने के तय मानदंडो का उल्लंघन करते हैं, यही नहीं इसका अनुपालान करने के लिए जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के रोक-टोक करने पर उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं जो अनुचित और निंदनीय है। ऐसा कर वह स्वयं का नुकसान कर रहे हैं। उन्हें सावधान हो जाना चाहिए और उक्त मानदंडों के अनुपालन में हर संभव सहयोग देना चाहिए। इसकी रोकथाम के लिए जो कुछ किया जा रहा है या करने के लिए कहा जा रहा है वह हर देशवासी के हित में है। साथ ही चिकित्सा क्षेत्र और व्यवसाय से जुड़े जो लोग इस देश और दुनिया के परीक्षा काल को अधाधुंध मुनाफाखोरी का अवसर मान रहे है उन्हें भी अपनी उन ओछी हरकतों से बाज आना चाहिए। कारण आपदा थोड़े दिन की होती है लेकिन ईश्वर सब देखता है और सबको अपने अच्छे या बुरे कर्मो का हिसाब एक न एक दिन यहीं यानी इसी धराधाम में देना होता है, तो सब पूरी ईमानदारी के साथ इस महामारी को शिकस्त देने के अभियान में भागीदार बनें।

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