सीबीआई जांच से डर रही है राज्य सरकार: दानवे


केंद्रीय राज्यमंत्री और पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राव साहेब दानवे का कहना है कि एकनाथ खड़से राकांपा में जाने का मन पूरी तरह बना चुके थे। खड़से के आरोपों को सिरे से नकारते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा में सामूहिक फैसले लिए जाते हैं। महाविकास आघाड़ी सरकार ने बिना इजाजत सीबीआई को राज्य में आने पर रोक लगा दी है। इस पर दानवे ने कहा कि सरकार कई मामलों में सीबीआई जांच से डर रही है। पेश है उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश: 

सीबीआई जांच से डर रही है राज्य सरकार: दानवे 

अभी हॉल ही में भाजपा के वरिष्ठ नेता एकनाथ खड़से पार्टी छोड़कर राकांपा में शामिल हो गए, इस पर आप क्या कहेंगे? 

एकनाथ खड़से पिछले कई महीनों से नाराज चल रहे थे। उन्हें मनाने की पार्टी के शीर्ष नेताओं ने पूरी कोशिश की, लेकिन उन्होंने राकांपा में जाने का मन बना लिया था। उन्हें भाजपा ने बहुत कुछ दिया। कई बार विधायक की टिकट से लेकर नेता प्रतिपक्ष और मंत्री पद दिया। उनके साथ-साथ उनकी बहू और बेटी को भी पार्टी ने टिकट दिया। इसके बावजूद खड़से असंतुष्ट थे, क्योंकि उन्हें राकांपा में शामिल होना था। 

खड़से ने भाजपा पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं? 

भाजपा में निर्णय कभी भी एक व्यक्ति विशेष की तरफ से नहीं लिए जाते। निर्णय लेने के लिए एक कोर कमेटी बनाई गई है, जिसमें बैठक के बाद सामूहिक निर्णय लिए जाते हैं और वे सभी को मानने पड़ते हैं, इसलिए खडसे ने जो आरोप लगाए हैं, वे निराधार और बेबुनियाद हैं। 

महाविकास आघाड़ी सरकार ने बिना इजाजत सीबीआई को राज्य में आने पर रोक लगा दी है, इस निर्णय को कैसे देखते हैं? 

मुझे लगता है कि राज्य सरकार कई मामले में सीबीआई की जांच से डर रही है, इसलिए सरकार ने यह निर्णय लिया है। साल 1989 में सीबीआई को राज्य में जांच करने की छूट दी गई थी, यह अनुमति वर्षों से चली आ रही है। पिछली हमारी सरकार के समय ऐसा कुछ निर्णय नहीं लिया गया और सीबीआई को जांच करनी की पूरी छूट थी, लेकिन इस सरकार को सीबीआई से इसलिए डर लगा रहा है, क्योंकि जो वह कारनामें कर रही है, उनका भंडाफोड़ न हो जाए। 

क्या राज्य सरकार बदले की भावना से काम कर रही है? 

बिल्कुल, राज्य की सरकार बदले की भावना से काम कर रही है। विपक्ष तो छोड़ दीजिए, सरकार अपने ही पार्टियों के कार्यकर्ताओं का काम नहीं कर रही है, जिसे लेकर सत्ताधारी पार्टी के नेता और कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। राज्य के कई जिलों में भारी बारिश के कारण हुए लोगों के नुकसान को लेकर सरकार गंभीर नहीं है, इसलिए बड़ी संख्या में सत्ताधारी पार्टी के नेता नाराज हैं। 

राज्य सरकार की तरफ से किसानों की सहायता के लिए घोषित पैकेज से आप संतुष्ट हैं? 

हम इस पैकेज से संतुष्ट नहीं है, क्योंकि राज्य की तत्कालीन देवेंद्र फड़नवीस सरकार से उद्धव ठाकरे ने किसानों के मदद के लिए 50 हजार प्रति एकड़ देने की मांग की थी, अब वे खुद राज्य के मुख्यमंत्री हैं और उन्होंने किसानों को प्रति हेक्टेयर 10 हजार देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री को हेक्टेयर और एकड़ में फर्क नहीं दिखाई पड़ रहा है। सरकार के इस आर्थिक घोषणा से विपक्ष के साथ-साथ किसान भी संतुष्ट नहीं है। राज्य में भारी बारिश से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। भाजपा की तरफ से बार-बार किसानों को मुआवजा देने की मांग के बाद सरकार जागी और मुख्यमंत्री ने 10 हजार करोड़ रुपए की आर्थिक मदद घोषित की, लेकिन यह मदद ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। 

राज्य की मंदिरों को खोलने की मांग पर संघर्ष जारी है? 

भाजपा की इस मामले में स्पष्ट भूमिका है। जब राज्य में बीयर -बार, शराब की दुकान खुल गई हैं तो मंदिरों को सरकार क्यों नहीं खोल रही है, इसलिए हमारी सरकार से मांग है कि जल्द से जल्द मंदिरो को खोला जाए। 

क्या महाविकास आघाड़ी सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर पाएगी? 

भाजपा मजबूत विपक्ष की भूमिका निभा रही है और पार्टी की सरकार को गिराने में कोई दिलचस्पी नहीं है, लेकिन सरकार में शामिल तीनों पार्टियों के बीच बार-बार मतभेद की चर्चाएं सामने आ रही हैं, उससे स्पष्ट है कि यह सरकार आपसी अंतर्कलह के कारण गिर जाएगी, क्योंकि तीनों पार्टियों की विचारधारा अलग-अलग है। 


बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर आपका क्या आकलन है? 

बिहार में एनडीए की पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी। पिछले छह साल में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और राज्य की नीतिश कुमार सरकार ने विकास के जो काम किए हैं, उससे जनता संतुष्ट है और वह दोबारा एनडीए को ही चुनेंगी। 


देश में सबसे अधिक कोरोना मरीज महाराष्ट्र में है? 

चीन के बाद सबसे अधिक जनसंख्या वाला भारत देश है, लेकिन अन्य देशों के मुकाबले भारत में कोरोना महामारी का कम प्रभाव हुआ। जिसका प्रमुख कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा समय पर लॉकडाउन लगाने का फैसला रहा। प्रधानमंत्री ने समय-समय पर देश की जनता को संबोधित कर कोरोना से बचाव के लिए नियमों के पालन करने का आव्हान किया। इसका प्रतिसाद देश की जनता ने दिया। महाराष्ट्र में जिन शहरों में आबादी अधिक है, वहीं की स्थिति खराब है। इनमें मुंबई, पुणे शहर शामिल हैं, लेकिन मौजूदा समय में स्थिति नियंत्रण में आ रही है। 


पिछले दिनों राज्य में सुशांत सिंह राजपूत मामला काफी चर्चा में रहा, आप इस पर क्या कहेंगे? 

सुशांत सिंह राजपूत का मामला हमारा नहीं था, हमने इस विषय पर कभी चर्चा नहीं की। सीबीआई जांच की मांग सुशांत के परिवार और कुछ उनके चाहने वालों ने सर्वोच्च न्यायालय से की थी, जिसके आदेश के बाद केंद्र सरकार ने सीबीआई जांच को हरी झंडी दी। मामले की जांच चल रही है और सच्चाई सामने आ जाएगी। 


राज्य की आर्थिक स्थिति खराब है, इसका जवाबदार कौन है? 

कोरोना महामारी को लेकर लगाए गए लॉकडाउन के कारण राज्य की आर्थिक स्थिति खराब हुई है, इसलिए किसी को इसका जवाबदार नहीं माना जा सकता। अब जब धीरे-धीरे बाजार खुलने शुरू हो गए हैं तथा आर्थिक स्थिति भी पटरी पर आनी शुरू हो गई है। इसके बाद अगर स्थिति नहीं सुधरी तो इसका जवाबदारी तय की जाएगी। 


क्या राज्य और देश की जनता को मुफ्त अनाज देने की समय सीमा बढ़ाई जाएगी? 

लॉक डाउन के दौरान केंद्र सरकार द्वारा गरीबों को नवंबर तक मुफ्त अनाज देने की योजना को समय को देखते हुए बढ़ाया जाएगा। देश की आगे की परिस्थिति को देखते हुए और जनता को अगर रोजगार मिलने लगा तो मुफ्त अनाज की मांग नहीं रहेगी। इसके साथ वन नेशन और वन राशन कार्ड की योजना एक साल के भीतर पूरे देश में लागू हो जाएगी। 


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