सेवानिवृत्त शिक्षकों को पेंशन का इंतजार

मुंबई

कई दशकों तक विद्यार्थियों को शिक्षित करने वाले अनुदानित प्राथमिक स्कूलों के सेवानिवृत्त लगभग 100 शिक्षकों को पिछले 5 साल से पेंशन का इंतजार है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक मामले में दिए गए फैसले के आधार पर मुंबई मनपा ने अनुदानित प्राथमिक स्कूलों के लगभग 100 सेवानिवृत्त शिक्षकों को पेंशन देने से वंचित किया हुआ है। नतीजतन बुढ़ापे में इन वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है। अदालत के अनुसार मनपा के 100 प्रतिशत अनुदानित स्कूलों के शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद प्रशासन द्वारा पेंशन दी जानी चाहिए। इसके बावजूद भी इन स्कूलों में 100 शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी पेंशन से वंचित हैं। मनपा द्वारा यह दावा किया गया है कि यदि शिक्षकों के सेवानिवृत्ति के बाद स्कूल 100 प्रतिशत अनुदानित है तो ही मनपा पूर्ण सेवा पेंशन का भुगतान करने के लिए बाध्य हैं, जबकि अदालत ने इस दावे को खारिज कर दिया है।

निर्णायक निर्णय बना आधार

उल्लेखनीय है कि शिक्षिका अनुराधा जयंत गंगाखेड़कर ने बंबई उच्च न्यायालय में 26 जुलाई 2012 को ऐसे ही मामले में याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने मनपा के खिलाफ फैसला सुनाया था। इसके बाद मनपा ने उच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की। वहां से खारिज होने के बाद उच्चतम न्यायालय में अपील की। लेकिन दोनों जगह से पराजित होने बाद मनपा ने कुछ साल बाद गंगाखेड़कर को नियमानुसार बकाया राशि के साथ पेंशन दी। इसमें भी मनपा ने 1995 के वेतन के अनुसार गंगाखेडकर को गलत तरीके से पेंशन का भुगतान किया।


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